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गहलोत सरकार के तीन साल : कई निर्णयों पर सरकार को लेना पड़ा यू-टर्न

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार गुरुवार को तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। इस दौरान सरकार ने तमाम विकास कार्यों नीतिगत निर्णयों के साथ कई बार ऐसे मौके भी आए जब जनमानस के विरोध को देखते हुए यू-टर्न लेना पड़ा।

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3 years of Gehlot Government: Government U-turn on many decisions

सुनील सिंह सिसोदिया/जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार गुरुवार को तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। इस दौरान सरकार ने तमाम विकास कार्यों नीतिगत निर्णयों के साथ कई बार ऐसे मौके भी आए जब जनमानस के विरोध को देखते हुए यू-टर्न लेना पड़ा। सीधे जनता से जुड़े करीब आधा दर्जन से अधिक निर्णयों को लेकर सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

गैर पार्षद के निकाय प्रमुख बनाने पर देना पड़ा स्पष्टीकरण
राज्य सरकार ने शहरी निकायों में गैर पार्षद के भी चेयरमैन व मेयर बनने का प्रावधान रखा, इसका पायलट ने विरोध किया। इससे पार्टी में अंदरखाने विरोध शुरू हुआ तो सरकार को स्पष्ट करना पड़ा कि चेयरमैन व मेयर के लिए पुराना पैटर्न ही लागू रहेगा।

सरपंचों का विरोध, फिर करने पड़े पीडी खाते चालू
राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को उनके अकाउंट की जगह नए पीडी अकाउंट खुलवाने के लिए कहा। ग्राम पंचायत का बजट पंचायत की जगह पीडी खातों में जाने लगा तो सरपंचों ने अपने अधिकारों को लेकर विरोध किया और सरकार को पुरानी व्यवस्था को ही लागू करना पड़ा।

विरोध हुआ तो बाल विवाह रजिस्ट्रेशन बिल पर लिया यू-टर्न
विधानसभा के मानसून सत्र में हाल ही बाल विवाह के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को लेकर विधेयक लाया गया तो इसका भारी विरोध हुआ। हाईकोर्ट में इस बिल को लेकर याचिका लगाई, उधर राज्यपाल ने इस बिल को रोके रखा। इस विधेयक से बाल विवाह को बढ़ावा मिलने के आरोप लगे तो मुख्यमंत्री ने बिल वापस लेने का एलान किया।

पहले आतिशबाजी पर रोक, फिर हटानी पड़ी
सरकार ने कोरोना गाइडलाइन का हवाला देते हुए पहले अक्टूबर में दिवाली और नववर्ष पर सहित अन्य कार्यक्रमों में आतिशबाजी पर रोक लगा दी। बाद में पटाखा व्यापारी विरोध में उतरे तो दो घंटे के लिए ग्रीन पटाखों के साथ आतिशबाजी करने की अनुमति दे दी।

पेट्रोल-डीजल पर वैट कम नहीं करने की जिद पर अड़े रहे
केन्द्र सरकार के बाद जब अन्य तमाम राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर पेट्रोल-डीजल सस्ता कर जनता को राहत दी तो पहले राजस्थान में वैट कम करने से सरकार ने मना कर दिया। लेकिन बाद में कांग्रेस सासित राज्य पंजाब ने वैट कम किया तो राजस्थान सरकार को भी दरें कम करनी पड़ी।

स्कूल-कॉलेज खोलने के मुद्दे पर आए बैकफुट पर
कोरोना का असर कम होने पर केबिनेट बैठक के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने 2 अगस्त से स्कूल खोलने की घोषणा कर दी। लेकिन बाद में विरोध हुआ तो स्कूल-कॉलेज खोलने के फैसले के लिए मंत्रियों की कमेटी गठित कर उस पर फैसला छोड़ दिया।

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