भारतीय खाद्य निगम द्वारा खुले बाजार में गेहूं दिए जाने की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। यही वजह है कि गेहूं में गिरावट देखी जा रही है।
भारतीय खाद्य निगम द्वारा खुले बाजार में गेहूं दिए जाने की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। यही वजह है कि गेहूं में गिरावट देखी जा रही है। सरकार 30 लाख मीट्रिक टन गेहूं को बेचने और राज्य सरकारों, केंद्रीय भंडार, नेशनल कंज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, राज्य सहकारी समितियों/संघों आदि को बिक्री करने का फैसला किया है, ताकि गेहूं और आटा की कीमतों में कमी आ सके। ऊंचे भावों से दड़ा गेहूं मिल डिलीवरी 500 रुपए प्रति क्विंटल सस्ता हो चुका है। खुले बाजार में गेहुं बेचने के सरकारी फैसले के बाद पिछले सप्ताह जयपुर मंडी में गेहूं की कीमतें काफी नीचे आ गईं थी। इधर, मित्तल दलिया के निर्माता मुकुल मित्तल ने कहा कि गेहूं के अनुपात में मैदा, सूजी की कीमतों में गिरावट नहीं आई है। केन्द्र सरकार द्वारा ई-नीलामी के माध्यम से 30 लाख टन गेहूं बेचने की घोषणा बाजार में मांग की तुलना में काफी कम है। इसलिए गेहूं की कीमतों में फिर से तेजी बनने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
तूर और उड़द मुक्त श्रेणी में
दालों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को संतुलित करने के लिए तूर और उड़द के आयात को 31 मार्च 2024 तक 'मुक्त श्रेणी' में रखा गया है और मसूर पर आयात शुल्क को घटाकर मार्च 2024 तक शून्य कर दिया गया है। तूर के संबंध में जमाखोरी और प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तुअर के स्टॉकहोल्डर्स द्वारा स्टॉक प्रकटीकरण को लागू करने और स्टॉक की निगरानी और सत्यापन करने के लिए एक निर्देश जारी किया है।