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गांधी जी का ‘स्वच्छता‘ का सपना सिर्फ सरकारी कागजों में, यहां हकीकत है कुछ और

स्वच्छता महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) का प्रिय विषय और एजेंडा था। गांधीजी ने अपने बचपन में ही भारतीयों में स्वच्छता के प्रति उदासीनता की कमी को महसूस कर लिया था और उन्होंने किसी भी सभ्य और विकसित मानव समाज के लिए स्वच्छता के उच्च मानदंड की आवश्यकता को समझा...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Jan 30, 2020

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जयपुर। स्वच्छता महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) का प्रिय विषय और एजेंडा था। गांधीजी ने अपने बचपन में ही भारतीयों में स्वच्छता के प्रति उदासीनता की कमी को महसूस कर लिया था और उन्होंने किसी भी सभ्य और विकसित मानव समाज के लिए स्वच्छता के उच्च मानदंड की आवश्यकता को समझा। उनमें यह समझ पश्चिमी समाज में उनके पारंपरिक मेलजोल और अनुभव से विकसित हुई थी। अपने दक्षिण अफ्रीका के दिनों से लेकर भारत तक वह अपने पूरे जीवन काल में निरंतर बिना थके स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करते रहे। गांधीजी के लिए स्वच्छता एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा था। 1895 में जब ब्रिटिश सरकार ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों और एशियाई व्यापारियों से उनके स्थानों को गंदा रखने के आधार पर भेदभाव किया था, तब से लेकर अपनी हत्या के एक दिन पहले 20 जनवरी 1948 तक गांधीजी लगातार सफाई रखने पर जोर देते रहे। हमारे देश में भी पिछले तीन चार साल में स्वच्छता के प्रति जागरूकता आई है। अब कहना गलत नहीं होगा की स्वच्छता के लिए क्रांति आई है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि ये स्वच्छता की ज्वाला केवल फाइलों और रिकॉड्र्स में ही दब कर रह जाती है या फिर स्वार्थ के लिए राजनीति का शिकार बन जाती है।

स्वच्छ भारत मिशन : आंकड़े खोल रहे पोल
राजस्थान में राज्य सरकार ने वर्ष 2018 के आखिर में विधानसभा चुनाव को देखते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत जून 2018 में राजस्थान को ओडीएफ घोषित कर दिया। इसके लिए आननफानन में कई नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया गया। जबकि उन नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण के शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सके थे। सरकार की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार 2 अक्टूबर 2014 से दिसम्बर 2017 तक सिर्फ 66 नगरीय निकायों को ही ओडीएफ घोषित कर पाई थी। जबकि अगले 6 महीनों में बाकी बचे 125 निकायों को खुले में शौच मुक्त कर दिया गया। लेकिन सरकार की ओडीएफ घोषणा सिर्फ कागजी थी, प्रदेश के अब भी हजारों लोग ऐसे हैं, जिन्हें शौचालय निर्माण के लिए दूसरी किश्त के पैसे नहीं मिले हैं। बिना पैसों के बड़ी संख्या में शौचालय अधूरे पड़े हैं। कम पानी वाले इलाकों में जो शौचालय बनाए गए थे, लोग पानी के अभाव में उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन के आंकड़ों का जो सच एनएसएस के सर्वे में सामने आया है वह सरकारी दावों की पोल खोल रहा है।


स्वच्छ भारत मिशन सरकारी आंकड़ों में
शौचालय निर्माण — 74,54,899 (31 )
2019—20 में — 674
- सभी 33 जिले ओडीएफ घोषित
- सभी 9892 ग्राम पंचायत ओडीएफ घोषित
- सभी 42,860 गांव ओडीएफ घोषित
- सभी 191 नगरीय निकाय ओडीएफ घोषित

सितम्बर 2018 तक 72,33,580
2019—20 में 1,34,185


सरकार ने यूं हासिल किया कागजी लक्ष्य
2014 — 27.62 प्रतिशत
2015—16 — 53.61 प्रतिशत
2016—17 — 80.13 प्रतिशत
2017—18 — 99.95 प्रतिशत
2018—19 — 99.99 प्रतिशत
2019—20 — 100 फीसदी

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