8 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पद्मश्री डॉ. गिरीश भारद्वाज ‘ब्रिज मैन’ की अनोखी यात्रा, ग्रामीणों के श्रमदान से बना पहला पुल, बन गया 140 पुलों का आधार

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के सुल्या तालुक के आलेट्टी गांव में अरंबूर और कूटेलु के बीच पयस्विनी नदी पर नाव से आवागमन होता था। बरसात में नदी उफान पर आने से दोनों किनारों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। ग्रामीणों ने कुशालनगर के एक झूला पुल से प्रेरित होकर स्थानीय युवा इंजीनियर डॉ. गिरीश भारद्वाज से संपर्क किया। गांव वालों ने चंदा इकट्ठा किया, निर्माण समिति बनाई और श्रमदान के जरिए पुल बनाने का फैसला लिया।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Newsdesk

Jul 22, 2026

Rajasthan

सुल्या के अरंबूर-कूटेलु में बना डॉ. गिरीश भारद्वाज का पहला सस्पेंशन ब्रिज आज भी ग्रामीण नवाचार और जनसहभागिता की मिसाल B सुल्या (दक्षिण कन्नड़). एक गांव की पीड़ा, ग्रामीणों का सामूहिक संकल्प और एक युवा अभियंता का नवाचार-इन तीनों के संगम ने देश के विख्यात ‘ब्रिज मैन’ एवं पद्मश्री डॉ. गिरीश भारद्वाज की पहली झूला पुल (सस्पेंशन ब्रिज) परियोजना को जन्म दिया। सुल्या तालुक के आलेट्टी गांव के अरंबूर और कूटेलु के बीच पयस्विनी नदी पर वर्ष 1989 में निर्मित यह पुल आज भी उनके इंजीनियरिंग सफर का पहला ऐतिहासिक पड़ाव माना जाता है।

बरसात में टूट जाता था दोनों किनारों का संपर्क

इस पुल के निर्माण से पहले ग्रामीणों को पयस्विनी नदी पार करने के लिए केवल नाव का सहारा लेना पड़ता था। बरसात में नदी उफान पर होने से दोनों किनारों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। इसी दौरान कुशालनगर के कावेरी निसर्गधाम में बने झूला पुल से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने अपने ही क्षेत्र के युवा अभियंता डॉ. गिरीश भारद्वाज से संपर्क किया और एक निर्माण समिति बनाकर चंदा संग्रह शुरू किया।

जनसहभागिता और श्रमदान से बना पहला झूला पुल

अधिकांश निर्माण श्रमदान के माध्यम से पूरा किया करीब 1.50 लाख रुपए का जनसहयोग जुटाया गया। जिला पंचायत और ग्राम पंचायत से भी आर्थिक सहायता मिली, जबकि अधिकांश निर्माण कार्य ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से पूरा किया। डॉ. भारद्वाज के तकनीकी मार्गदर्शन और ईरान से लौटे अभियंता डी.एम. सुमित्र की सलाह से दोनों किनारों पर ऊंचे पिलर बनाए गए। प्रतिकूल मौसम के बावजूद महज एक महीने में पुल तैयार हो गया।

'ब्रिज मैन' की ऐतिहासिक यात्रा

यहीं से शुरू हुई ‘ब्रिज मैन’ की यात्रा अरंबूर-कूटेलु का यही पहला झूला पुल आगे चलकर डॉ. गिरीश भारद्वाज की उस ऐतिहासिक यात्रा की नींव बना, जिसके तहत उन्होंने देशभर में 140 से अधिक झूला पुलों का निर्माण कराया। हालांकि इस पुल पर वाहनों की आवाजाही संभव नहीं थी, इसलिए ग्रामीणों की समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं। गर्मियों में लोग रेत से भरी बोरियां और पत्थर डालकर अस्थायी मार्ग तैयार करते थे। बाद में स्थायी वाहन पुल की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष चला और अंतत: नया पुल बनने से आवागमन सुगम हो गया। गौरव का प्रतीक ग्रामीण एस.एम. बापू साहेब के अनुसार, गांव के लोगों की परेशानी दूर करने के उद्देश्य से बना यही झूला पुल डॉ. गिरीश भारद्वाज की उपलब्धियों का पहला कदम साबित हुआ। इसके निर्माण में गांव के अनेक लोगों ने श्रमदान किया था और यह आज भी हमारे गांव के गौरव का प्रतीक है।