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चिल्हर नहीं है तो खाओ माउथ फ्रेशनर

नगर में पिछले कुछ महीनों से चिल्हर की लगातार तंगी होने के कारण व्यापारियों से लेकर ग्राहकों तक लेन-देन की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं

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Chandu Nirmalkar

May 04, 2016

PNB news

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गरियाबंद.
नगर में पिछले कुछ महीनों से चिल्हर की लगातार तंगी होने के कारण व्यापारियों से लेकर ग्राहकों तक लेन-देन की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। व्यापार एवं व्यवसाय में चिल्हर पैसों की लगातार तंगी के चलते इन दिनों दुकानदार ग्राहकों को चिल्हर के बदले चाकलेट, पाउच, सादा गुटखा, माउथ फ्रेशनर तक देने लगे हैं। ऐसे में जिन ग्राहकों को चिल्हर लेना हो तो उन्हे शेष बचे पैसों से सामान लेना अनिवार्य हो जाता है।


बैंक नहीं कर रहे वितरण

नगर के बैंकों द्वारा चिल्हर का वितरण किया जाता है, लेकिन इस समय कुछ महीनों से चिल्हर का वितरण नहीं होने के कारण व्यापारी चिल्हर की समस्या से जूझ रहे है। चिल्हर की कमी से पूरे बाजार और व्यवसायिक परिसर में तंगी का महौल देखने को मिल रहा है।


गौरतलब है कि सिक्कों की समस्या से सबसे अधिक प्रभाव नगर से लेकर अंचलों के किराना दुकान, पान ठेला, सब्जी मंडी, ठेलेवाले व होटलों में भी देखने को मिल रहा है। जो इसी तरीके शेष बचे पैसों के बदले सामान थमाकर अपना काम चला रहे हैं। कभी कभी चिल्हर के बदले पाउच, चाकलेट पकड़ा देने से व्यवसायियों तथा ग्राहकों के बीच झड़प तक हो जाती है तथा विवाद की स्थिति बन जाती है। वहीं चिल्हर की समस्या को लेकर व्यापारियों से पूछा गया तो उनका कहना है कि कुछ महीनों से चिल्हर की शार्टेज होने के कारण व्यवसाय में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


एक, दो और पांच के नोट विलुप्त

व्यापारियों का कहना है कि बाजार में पांच, दो तथा एक के नोट पूरी तरह से विलुप्त हो गए हैं जिसके बाद सिक्कों का भी वर्तमान में यही स्थिति है। चिल्हर की समस्या गत वर्षों पहले भी थी, जब बाजार में एक, दो, पांच के फटे पुराने नोटों के कारण व्यापारियों की तकलीफ काफी बढ़ गई थी। जिसके चलते बैंको द्वारा एक, दो, पांच के सिक्कों को अधिक मात्रा में जारी करने से व्यापारियों व्यवसायियों को राहत मिली।


वहीं स्थिति कुछ समय तक ठीक थी, लेकिन आज सिक्कों की तंगी के कारण व्यवसाय में संकट की स्थिति फिर पैदा हो गई है। नागरिकों तथा व्यवसायियों का मानना है कि चिल्हर की तंगी का कारण एक, दो, पांच के सिक्कों का लोगों द्वारा गुल्लकों में जमाव है जिसके चलते ऐसी समस्याओं का सामना आम जनता को करना पड़ रहा है। व्यापारियों का यह भी कहना है कि बैंको से भी पर्याप्त चिल्हर पैसों का आबंटन नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते स्थानीय स्तर पर चिल्हर पैसों की तंगी बढ़ गई है।

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