
Aditya Hradaya Stotra Surya Puja Ke Labh Lord Sun Worship
जयपुर. 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आ चुका है। 8 जून तक सूर्यदेव इसी नक्षत्र में रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य बहुत प्रबल रहते हैं। ऐसे में सूर्य पूजा भी बहुत फलदायी होती है। सूर्य पूजा से कुंडली में सूर्य के अशुभ असर में कमी आ सकती है और शुभ प्रभाव बढ़ जाता है। सूर्यदेव नवग्रहों के राजा हैं और उनका शुभ प्रभाव कुंडली के समस्त दोषों को दूर कर देता है। खासतौर पर रविवार को सूर्य पूजा त्वरित फलदायी होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि सूर्य उपासना से आरोग्य प्राप्त होता है। खासतौर पर प्रशासन या सरकारी कामकाज में आनेवाले अवरोध भी खत्म होने लगते हैं। सूर्य देव की प्रसन्नता के लिए रोज सुबह उगते हुए सूरज को जल चढ़ाना चाहिए। तांबे के लोटे में लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय गायत्री
मंत्र का जाप करना चाहिए।
सूर्यदेव को नित्य जल चढ़ाने से धीरे—धीरे उनका अशुभ असर कम होकर शुभ असर प्राप्त होने लगता है। सूर्योपासना से शक्ति प्राप्त होती है और सेहत अच्छी बनी रहती है। सूर्यदेव यश—सम्मान के कारक हैं, साथ ही सरकारी नौकरी या उच्च पद भी उनके आशीर्वाद से ही प्राप्त होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि आजकल लोगों में धन के साथ ही यश—मान—सम्मान की चाह भी बढ रही है जोकि सूर्यदेव की कृपा से ही प्राप्त होते हैं।
विधिवत पूजन-अर्चन से वे प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में यश—सम्मान प्राप्त होता है। इसके लिए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही भगवान सूर्य का विधिपूर्वक पूजन भी करना चाहिए। सूर्यदेव की प्रसन्नता के लिए आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ जरूर करें। संभव हो तो इसका तीन बार पाठ करें। हर बार पाठ पूर्ण होने पर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। विश्वासपूर्वक सूर्यपूजा और आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करने से पद—प्रतिष्ठा में वृद्धि जरूर होती है।
Published on:
29 May 2021 04:41 pm
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