
जयपुर।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद अब पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गरमा रहा है। राजनितिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी पायलट एक बार फिर सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के बीच चर्चाएँ खासतौर से इस बात को लेकर है कि पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘हाथ’ छोड़ ‘कमल’ थामा और अब जितिन प्रसाद ने भी खेमा बदला लिया, अब अगला नंबर किसका होगा? सोशल मीडिया यूज़र्स ‘पाला बदलने’ वाली संभावित फहरिस्त में अब सचिन पायलट को ही सबसे ऊपर रखकर कई तरह की अटकलें लगा रहे हैं।
इस बीच सूत्र बताते हैं कि जितिन प्रसाद प्रकरण के बाद अब भाजपा की निगाह भी सचिन पायलट पर आकर टिकी हुई हैं। भाजपा पहले भी पायलट को अपने खेमे में करने की पुरजोर ताकत लगा चुकी है, हालांकि उसे अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी है।
भाजपा लगा चुकी है पूरी ताकत
गहलोत और पायलट गुट के बीच बने गतिरोध के दौरान भाजपा ने सचिन पायलट को अपने कुनबे में शामिल होने को लेकर हर संभव प्रयास किये थे। तब एक बारगी पूरी संभावनाएं जताई जा रही थी कि पायलट कांग्रेस पार्टी का वर्षों पुराना साथ छोड़ सकते हैं। संभावना थीं कि पायलट अपने गुट के कई विधायकों के साथ पाला बदल सकते हैं। उस दौरान भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश पर कई सीनीयर नेता इस मिशन को अंजाम देने में सक्रीय हो गए थे। लेकिन भाजपा के अरमानों पर तब पानी फिर गया जब कांग्रेस में बगावत थम गई और कांग्रेस आलाकमान गहलोत-पायलट गुट के विवाद को सुलझाने में कामयाब हो गई।
अभी भी नहीं छोड़ी भाजपा ने आस
जितिन प्रसाद प्रकरण के बीच सचिन पायलट की सत्ता-संगठन से बरकरार नाराजगी के बीच भाजपा को अब भी उम्मीद है कि पायलट अब भी दल बदल सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक़ भाजपा आलाकमान की पायलट के बगावती तेवरों पर पैनी नज़र बनी हुई है। पार्टी नेता अब बस उस ‘सुनहरे’ मौके की तलाश में हैं जब प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव हो।
कांग्रेस के लिए चुनौती
ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद जैसे युवा और अनुभवी नेताओं का साथ छूटने के बाद अब सचिन पायलट को रोकना कांग्रेस पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है। ऐसे में पायलट और उनके खेमे की नाराजगी को दूर करना कांग्रेस आलाकमान के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार और शेष रही राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट और उनके खेमे के विधायकों को ज़्यादा से ज़्यादा तरजीह दिए जाने के बाद ही इस नाराजगी को दूर किया जा सकता है।
... ना जाने कब क्या हो जाये?
उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट खेमे के बढ़ते कथित असंतोष का हवाला देने हुए एक प्रतिक्रिया में कहा, ‘आखिर मन का दर्द होठों पर आ ही गया। ये चिंगारी कब बारूद बनकर फूटेगी, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने अहम भूमिका निभाई थी। सुलह कमेटी के पास मुद्दे अब भी अनसुलझे ही हैं। ना जाने कब क्या हो जाए...’’ ।
पायलट को मिल चुका आमंत्रण!
भाजपा सांसद रीता बहुगुणा ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मैंने सचिन पायलट को फोन कर भाजपा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने पायलट को मोदी जी के साथ काम करने के लिए भाजपा में शामिल होने की बात कही थी।
Published on:
10 Jun 2021 12:33 pm
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