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कोटा के बाद भरतपुर के सरकारी अस्पताल ने किया शर्मसार, जानें अब क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री

'पत्रिका' के इन तस्वीरों और खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद हड़कंप मच गया। इस पूरे घटनाक्रम की गाज अस्पताल अधीक्षक पर गिर सकती है।

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After Kota, In Question Gehlot Government Hospital in Bharatpur

जयपुर/भरतपुर ।

राजस्थान में कोटा के बाद अब भरतपुर के सरकारी अस्पताल की शर्मसार करने वाली खबर सुर्ख़ियों में है। भरतपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीज़ों के बेड पर श्वानों का कब्ज़ा रहने की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं हैं। 'पत्रिका' के इन तस्वीरों और खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद हड़कंप मच गया।


इधर, शर्मिंदगी भरी तस्वीरें सामने आने के बाद सरकार का स्वास्थ्य महकमा भी फ़ौरन हरकत में आया। स्वास्थ्य मंत्री से लेकर जिला कलक्टर तक मीडिया के सामने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कार्मिकों पर सख्त एक्शन लेने के बयान दे रहे हैं। इस बीच जानकारी सामने आई है कि इस पूरे घटनाक्रम की गाज अस्पताल अधीक्षक पर गिर सकती है।


स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षक के खिलाफ सख्त एक्शन लिए जाने के संकेत दिए हैं। सोमवार को जयपुर में मीडिया को प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि अस्पतालों में लापरवाही और अव्यवस्थाएं किसी भी सूरत पर बर्दाश्त नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि हर लापरवाही सज़ा मांगती है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सरकार लाज बचाने के लिए अधीक्षक के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए उन्हें सस्पेंड कर सकती है।


ये है मामला:

प्रदेश में कोटा के सरकारी अस्पताल में गत दिनों 115 मासूमों की मौत के बाद हुए तमाम सरकारी दावों के ठीक बाद संभाग के सबसे बड़े जिला अस्पताल से चौंकाने वाली तस्वीरें देखने को मिली। पत्रिका में सोमवार को जिला अस्पताल के सर्जीकल वार्ड नंबर 5 की तस्वीर प्रकाशित हुई। नजारा रविवार तड़के 4 बजे का था।


तस्वीरों को देखकर भरोसा कर पाना मुश्किल था कि यह इंसानों का अस्पताल है। मरीज़ों के लिए लगे वार्ड के बेड्स पर श्वानों का डेरा जमा हुआ था। व्यवस्थाएं इतनी भयावह थीं कि जिसका सोच पाना भी मुश्किल था।


गंभीर बात इससे भी ज़्यादा ये थी कि पांच दिन पहले ही आरबीएम अस्पताल और जनाना अस्पताल का जिला कलक्टर दो बार और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ.सुभाष गर्ग भी एक बार निरीक्षण कर चुके हैं। फिर भी इस तरह के हालात दिखना कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


इस खबर के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया और जिला कलक्टर को फोन कर नाराजगी जताई। इसके बाद जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने सोमवार सुबह अस्पताल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाएं दुरस्त करने के निर्देश दिए। उधर, मामले में चिकित्साधिकारी को खासी फटकार लगाई है।

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