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संस्कृत विश्वविद्यालय में फिर पंगा,रजिस्ट्रार के छीने अधिकार

वित्त नियंत्रक को सौंपे रजिस्ट्रार के कार्य

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Sep 17, 2021


जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय (Jagadguru Ramanandacharya Rajasthan Sanskrit University) की कुलपति डॉ.अनुला मौर्य ने रजिस्ट्रार राजेंद्र सिंह चारण से शुक्रवार को कई अहम अधिकार छीन लिए हैं। दोनों के बीच बीते दिनों से खींचतान चल रही है। सूत्रों के अनुसार बुधवार को एक कर्मचारी के तबादले के प्रकरण में कुलपति ने रजिस्ट्रार पर दबाव डाला तो चारण ने उन्हें पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार करने की नसीहत दे डाली। इससे खफा होकर डॉ.मौर्य ने रजिस्ट्रार के पर कतर दिए हैं।
कुलपति ने शुक्रवार को एक आदेश जारी कर संस्थापन, सामान्य प्रशासन, स्टोर, पूल शाखा, शैक्षणिक, अनुसंधान, मंत्र प्रतिष्ठान, प्री शिक्षा शास्त्री टेस्ट से जुड़े सभी कार्य रजिस्ट्रार से छीन वित्त नियंत्रक उम्मेद सिंह को सौंप दिए हैं। यहां तक कि वेतन व आहरण तक का काम भी रजिस्ट्रार से छीन लिया है। वहीं जानकारों का कहना है कि कुलसचिव विश्वविद्यालय के अधिनियम का हिस्सा होता है और उसे अधिकार विश्वविद्यालय के अधिनियम 1998 के तहत मिले हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कुलसचिव के अधिकार कुलपति किसी दूसरे अधिकारी को कैसे दे सकती हैं?
पहले हो चुकी है तकरार
यह पहला मौका नहीं है जब कुलपति डॉ.अनुला मौर्य की रजिस्ट्रार के साथ पटरी नहीं बैठी है। पिछले तीन रजिस्ट्रारों से भी उनकी तनातनी रही। अशोक कुमार शर्मा, ज्योति भारद्वाज और सुरेंद्र सिंह यादव के साथ तो इतनी तनातनी हुई कि कुलपति ने उन तीनों को 15 नोटिस थमा दिए थे। सूत्रों के अनुसार डॉ.मौर्य ने मौजूदा रजिस्ट्रार को भी नोटिस देने की तैयारी कर ली है।

वित्त नियंत्रक पर खास कृपा
संभवत: यह पहला मौका है जब प्रदेश की किसी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की शक्तियां वित्त नियंत्रक को सौंपी गई हों। सूत्रों के अनुसार कुलपति डॉ.अनुला मौर्य की वित्त नियंत्रक उम्मेद सिंह पर विशेष कृपाश् है। इसी के नाते विधानसभा का सत्र होने के बावजूद वे तिरुपति की सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू करने के नाम पर हवाई यात्रा पर गए हैं। जबकि सरकार ने मितव्ययता के आदेश जारी कर रखे हैं। साथ ही एमओयू के लिए किसी प्रोफेसर का तिरुपति न जाकर केवल प्रशासनिक कर्मचारियों का जाना भी विश्वविद्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना ही नहीं, पिछले दिनों विश्वविद्यालय में हुई खरीद में गड़बड़ी की चर्चा भी दबी जुबान से हो रही है।