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‘अहम’ हुआ ‘विशेष’, ‘मुजरिम’ अब ‘अपराधी’ या ‘Culprit’

सरल होंगे दस्तावेज : दिल्ली पुलिस को उर्दू-फारसी के शब्दों से परहेज करने के निर्देश। 383 जटिल शब्दों के समानार्थी के साथ आयुक्त ने जारी किया सर्कुलर।

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जयपुर

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Aryan Sharma

Apr 14, 2023

 पुलिस

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नई दिल्ली. कहावत है कि 'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या।' लेकिन, पुलिस के दस्तावेजों में उर्दू-फारसी के कठिन शब्दों के इस्तेमाल को लेकर कई साल से अंगुलियां उठ रही हैं। आम शिकायत है कि पुलिस इन भाषाओं के जिन शब्दों का इस्तेमाल करती है, आम लोग समझ नहीं पाते। इसे ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने सर्कुलर जारी कर पुलिस को उर्दू-फारसी शब्दों के बजाय हिंदी या अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। सर्कुलर के मुताबिक, पुलिस अब 'अहम' शब्द की जगह 'विशेष' या 'स्पेशल' और 'मुजरिम' के बदले 'अपराधी' या 'कलप्रिट' का इस्तेमाल करेगी।
सर्कुलर में कहा गया है कि पहले भी इस बारे में निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पुलिस अधिकारी उर्दू और फारसी के ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आसानी से समझ नहीं आते। पुलिस आयुक्त ने कहा कि ऐसे शब्दों के स्थान पर हिंदी और अंग्रेजी के सरल विकल्प होने चाहिए। उन्होंने सभी जिला और जांच इकाइयों के लिए 383 जटिल शब्दों और उनके समानार्थी सरल शब्दों की सूची साझा की है। पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि एफआइआर, डायरी या चार्जशीट दाखिल करते समय जटिल उर्दू या फारसी शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

चार साल पहले हाईकोर्ट ने दिए थे निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट के 2019 में दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए थे कि ज्यादा अलंकारों वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिसका अर्थ शब्दकोश में ढूंढना पड़े। प्राथमिकी शिकायतकर्ता के शब्दों में होनी चाहिए। पुलिस जनता के लिए है, न कि उर्दू या फारसी में डॉक्टरेट की डिग्री वालों के लिए। हाईकोर्ट ने पाया कि एफआइआर और चार्जशीट में कुछ शब्द वकीलों और जजों की भी समझ से बाहर थे।

सर्कुलर में सुझाए गए कुछ शब्दों के समानार्थी
उर्दू-फारसी हिंदी अंग्रेजी
अदम शिनाख्त अज्ञात अनआइडेंटिफाइड
इकबाल स्वीकार कन्फेशन
इस्तगासा परिवाद कंप्लेंट
जेर-ए-तफ्तीश अनुसंधानाधीन अंडर इन्वेस्टिगेशन
ततीमा पूरक/अतिरिक्त सप्लीमेंट्री
दरयाफ्त पूछताछ इन्क्वायरी
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