
पीठासीन सम्मेलन: नौ संकल्प पारित, विधायिका आनन फानन में कानून पास करने से बचें : बिरला
अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का गुरूवार को समापन हो गया। इस मौके पर राज्यपाल कलराज मिश्र, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित अन्य वक्ताओं ने विधायिका को मजबूत बनाने और सदन में आनन फानन में कानून पास करने पर चिंता जताई और इसमें जनहित और अच्छी बहस की जरूरत बताई। राजस्थान विधानसभा के स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने सीएम अशोक गहलोत से राजस्थान की विधानसभा को पहली वित्तीय स्वायत्ता वाला सदन बनाने की पुरजोर मांग उठाई। इस पर सीएम गहलोत ने कहा कि इस बारे में विधानसभा अपना प्रस्ताव पास करके भिजवाएं, हम सकारात्मक रूप से विचार करेंगे। गहलोत ने कहा कि वैसे भी मैं अध्यक्ष की बात नहीं टालता हूंं। इस मौके पर सीएम गहलोत ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर कहा कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। सम्मेलन में नौ संकल्प भी पास किए गए। इसमेें भारत की जी 20 की अध्यक्षता, शक्तियों के पृथक्करण में आस्था, आदर्श समरूप नियम प्रक्रियाएं, विधानमंडलों की सभाओं में व्यवधान रोकने, समितियों की भूमिका और कार्यपालिका के कार्य की समीक्षा, राज्य विधानमंडलों के कार्य में वित्तीय स्वायत्ता,राष्ट्रीय डिजिटल ग्रिड, उत्कृष्ट विधायिका पुरस्कार और समाज के सभी वर्गो को संवैधानिक प्रावधानों और विधायी नियमों और प्रक्रियाओं की शिक्षा का संकल्प शामिल है।
बेहतर कानून बनाएं: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जी-20 में भारत की अध्यक्षता हम सभी का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि सभी विधायी संस्थाओं को अपने यहां बेहतर कानून बनाने का कार्य करना चाहिए। विधायी संस्थाओं में नियमों, प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाए। उन्होंने लोकसभा द्वारा स्वस्थ संसदीय परम्पराओं के लिए किए जा रहे काम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रयास किया जाएगा कि देशभर में विधायी संस्थाओं में आचरण, नियम-प्रक्रियाओं, परम्पराओं में एकरूपता हो। उन्होंने संसदीय समितियों में दल से ऊपर उठकर लोकतंत्र को सशक्त करने के लिए प्रयास किए जाने का आह्वान किया। बिड़ला ने कहा कि विधान सभाएं अपने-अपने राज्यों में आम जन की सतत भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कैसे लोकतांत्रिक संस्थाएं आदर्श बनें, कैसे दुनियाभर की विधायी संस्थाएं हमारे लोकतंत्र से प्रेरणा लें, इसके लिए भी सभी मिलकर कार्य करें।
पुरानी पेंशन योजना लागू करें:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में नागरिकों के स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की जनता के लिए स्वास्थ्य का अधिकार लागू कर इस तरह की योजना लाई जानी चाहिए। उन्होंने हर व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से देशभर में सामाजिक सुरक्षा कानून लाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार ने सोच-विचार कर मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखते हुए देश में एवं अन्य राज्यों में भी पुरानी पेंशन योजना लागू की जानी चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने कहा कि राजस्थान का संसदीय परम्पराओं का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने अपने सम्बोधन में विधायिका के प्रभावी संचालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होँने सम्मेलन में देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने राजस्थान विधानसभा को वित्तीय स्वायत्ता देने की मांग भी की। राज्यसभा के उप सभापति डॉ. हरवंश ने विधायी संस्थाओं की साख बढ़ाने के लिए कार्य करने पर जोर देते हुए महात्मा गांधी के आत्मानुशासन को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा विधायी संस्थाओं द्वारा कानून बनाना ही निदान नहीं है। प्रगति और विकास सतत साधना है, इसलिए सदन में गंभीर चर्चा और बहस का माहौल बने। उन्होंने विधायकों को पर्याप्त होम वर्क कर आने, प्रश्नों को तर्क सहित प्रस्तुत करने और मर्यादा के आचरण के साथ आत्मानुशासन अपनाने का आह्वान किया। प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चन्द कटारिया ने अपने सम्बोधन में विधायी समितियों के कार्य को और बेहतर बनाए जाने पर बल दिया। इस अवसर पर देश की विभिन्न विधानसभाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधायक और अधिकारी उपस्थित रहे।
Published on:
12 Jan 2023 06:42 pm
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