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नाटक में युवाओं में इच्छाओं और अपेक्षाओं का संघर्ष बयां

Hindi adaptation of American play -नाट्यकला के समुन्नायक और जयरंगम के संस्थापक दीपक गेरा की याद में शनिवार को महाराणा प्रताप सभागार में अमेरिकन नाटक कार टेनैसे विलियम्स की कृति 'दा ग्लास मेनेजरी' पर आधारित हिंदी नाटक 'कांच के खिलौने' का मंचन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और रंगकर्मी सौरभ श्रीवास्तव ने कांच के खिलौने का प्रोडक्शन तैयार किया है।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Oct 16, 2021

नाटक में युवाओं में इच्छाओं और अपेक्षाओं का संघर्ष बयां

नाटक में युवाओं में इच्छाओं और अपेक्षाओं का संघर्ष बयां


अमेरिकन नाटक 'दा ग्लास मेनेजरी' के हिंदी रूपांतरण 'कांच के खिलौने' का मंचन

जयपुर।

जयपुर। नाट्यकला के समुन्नायक और जयरंगम के संस्थापक दीपक गेरा की याद में शनिवार को महाराणा प्रताप सभागार में अमेरिकन नाटक कार टेनैसे विलियम्स की कृति 'दा ग्लास मेनेजरी' पर आधारित हिंदी नाटक 'कांच के खिलौने' का मंचन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और रंगकर्मी सौरभ श्रीवास्तव ने कांच के खिलौने का प्रोडक्शन तैयार किया है। नाटक 21वीं सदी के भारतीय युवाओं की इच्छाओं और भारतीय मध्यम वर्ग के लोगों की अपेक्षाओं के संघर्ष को बयां करता है। हालांकि मूल नाटक 1944 में लिखा गया था, जो बताता है कि 1940 में अमेरिका में जो संघर्ष थे, वे भारतीय समाज में 20वीं सदी तक पहुंचे, चूंकि मोटे तौर पर माना जाता है कि सामाजिक बदलावों के संदर्भ में भारतीय मध्यम वर्ग समाज अमेरीकन समाज से लगभग पचास वर्ष पीछे है।
नाटक में एक छोटे से अपार्टमेंट के मल्टी स्टोरी एलआईजी कॉलोनी में रहने वाले एक मध्यम वर्गीय परिवार की रोजमर्रा की घटनाएं दिखाई गई हैं, जिन्हें नाटक का सूत्रधार कहानियों की शक्ल देता जाता है। इस नाटक की कहानी का केंद्र था अमेरिकन समाज के परिवार में रिश्तों का टूटना। धीरे धीरे भारतीय समाज में भी यही परिदृश्य दिखने लगा है। नाटक में आनंदा सिन्हा, सुश्मिता श्रीवास्तव, रोहन, जितेंद्र सोनी, भानु भाटिया और संचित जैन ने अभिनय किया। प्रकाश परिकल्पना राजेंद्र शर्मा राजू, पाश्र्व संगीत आकाश कला, रूप सज्जा भुवनेश भटनागर और मंच सज्जा पुरुषोत्तम एवं कृष्ण कांत की थी।

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