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फलायर… 1500 साल पुराना गंगेश्वर महादेव मंदिर, तपोबल से हरा हुआ बरगद आज भी है जीवंत

जयपुर

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Newsdesk

Aug 10, 2026

Rajasthan

मुगलकाल से जुड़ा इतिहास, परिसर में है नाथ संतों की समाधियां

दूनी. जयपुर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग और दूनी तहसील मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर धुवांकला कस्बा दूर-दूर तक फैली हरियाली के बीच आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित प्राचीन गंगेश्वर महादेव मंदिर जन-जन की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के प्राचीन स्तंभ, छतरियां, ड्योढ़ी, स्थापत्य और निर्माण में लगे विशाल पत्थर इसके पुराने इतिहास की गवाही देते हैं। वर्षभर श्रद्धालुओं का यहां आना-जाना लगा रहता है। सावन में मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर जाता है। अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और ‘ओम नम: शिवाय’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

बादशाह ने कराया था मंदिर निर्माण

मंदिर के महंत घासीनाथ के अनुसार करीब 1500 वर्ष पूर्व यहां नाथ संप्रदाय के गुरु गद्दी पर बैठकर तपस्या करते थे। मान्यता है कि उस समय एक मुगल बादशाह मंदिरों को तोड़ते हुए अपनी सेना के साथ इस क्षेत्र से गुजर रहा था। गुरु को जब बादशाह के आने की सूचना मिली तो उन्होंने गद्दी के पास स्थित हरे बरगद के पेड़ को अपने तपोबल से सुखा दिया, ताकि बादशाह वहां रुककर विश्राम नहीं करे।

बादशाह ने दूर से सूखा पेड़ देखकर सैनिकों को उसे काटकर लाने का आदेश दिया। सैनिकों के गुरु के पास पहुंचने पर उन्होंने बादशाह के आने तक पेड़ काटने से मना कर दिया। बादशाह के पहुंचने पर गुरु ने कहा कि पेड़ सूखा नहीं है। जिद होने पर गुरु ने हाथ से पेड़ को थपकी दी और मान्यता के अनुसार वह फिर हरा हो गया। गुरु के तपोबल से प्रभावित बादशाह ने उनसे क्षमा मांगी। इसके बाद गुरु की अनुमति पर गद्दी स्थल पर शिव मंदिर का निर्माण कराया गया।

1500 साल बाद भी हरा है बरगद

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार गुरु के हाथ की थपकी से हरा हुआ बरगद आज भी मौजूद है और वर्षों बाद भी हरा-भरा है। श्रद्धालुओं के लिए यह बरगद मंदिर की सबसे खास पहचान में शामिल है।मंदिर परिसर में बनी एक मस्जिदनुमा कलाकृति भी यहां की सांप्रदायिक सद्भाव की कहानी बताती है। ग्रामीणों के अनुसार विशेष अवसरों पर आसपास के मुस्लिम समाज के लोग भी यहां आकर अरदास करते हैं। मंदिर परिसर में नाथ संप्रदाय के गुरु-शिष्यों की समाधियां भी बनी हुई हैं।
मंदिर के साथ मोतीसागर भी आकर्षण

पूर्व सरपंच प्रियदर्शिनी सोलंकी, भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह सोलंकी, ओमप्रकाश गुर्जर एवं पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि कैलाश नाथ ने बताया कि गंगेश्वर महादेव मंदिर और मोतीसागर बांध को पर्यटन क्षेत्र में शामिल किया जाए। गंगेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित मोतीसागर बांध का विहंगम दृश्य भी लोगों को आकर्षित करता है। मंदिर तक भरनी, गेरोली चौराहा और दूनी से पहुंचा जा सकता है। तीनों स्थानों से मंदिर की दूरी करीब छह किलोमीटर है।


दूनी. धुवांकला में फूलों से सजा प्रसिद्ध गंगेश्वर महादेव मंदिर।

फोटो कैप्शन:
दूनी. धुवांकला कस्बे में स्थित प्राचीन गंगेश्वर महादेव मंदिर।

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