
जहां दे रहे कर्मचारी धरना, वहीं कर रहे थे सीएम के कार्यक्रम की तैयारी
Rakhi Hajela
पहले आधी अधूरी तैयारियों के साथ राज्य स्तरीय कार्यक्रम के आयोजन का निर्णय ले लिया उस पर कार्यक्रम का आयोजन स्थल के लिए ऐसी जगह का चुनाव किया गया जहां मंत्रालयिक कर्मचारियों का धरना चल रहा है और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। अंत में जब कुछ नहीं सूझा तो लिया गया कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय। यह है प्रदेश के पशुपालन निदेशालय के अधिकारियों की लापरवाही के हाल।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि ऐसे पशुपालक जिनके दुधारू गोवंश की लम्पी से मौत हुई है उन्हें 40-40 हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे। इसी घोषणा की अनुपालना में पशुपालन निदेशालय ने तकरीबन 52 हजार से अधिक पशुपालकों को इस राशि का ऑनलाइन भुगतान करने के लिए सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग की ओर से तैयार करवाए गए सॉफ्टवेयर में डाटा फीडिंग का काम शुरू किया। साथ ही मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में 9 मई को राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन करने का निर्णय लिया गया, जिसमें प्रदेशभर से चयनित पशुपालक शामिल होने थे। कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों और कार्मिकों के शनिवार और रविवार के अवकाश तक निरस्त कर दिए गए।
डाटा ही मिस मैचजब सॉफ्टवेयर में फीड किए गए डाटा को चैक किया गया तो पता चला कि डाटा मिसमैच हो रहा है। उस पर जिस स्थान पर कार्यक्रम का आयोजन करने का मानस बनाया गया था वहां पर चल रहे मंत्रालयिक कर्मचारियों के धरने ने कोढ़ में खाज का काम कर दिया।
जहां दे रहे कर्मचारी धरना, वहीं होना था सीएम का कार्यक्रम
गौरतलब है कि गत 17 अप्रेल से मानसरोवर में वीटी रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड की जमीन भी मंत्रालयिक कर्मचारियों का महापड़ाव चल रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से कार्यक्रम के आयोजन के लिए जो स्थान चिह्नित किए गए थे उनमें से एक स्थान यह जमीन भी थी। विभागीय अधिकारियों ने तीन दिन पूर्व जब कार्यक्रम स्थल का दौरा किया तो पता चला कि मंत्रालयिक कर्मचारियों का धरना कार्यक्रम स्थल से तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर चल रहा है। जिसे देखकर अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए और उन्होंने ऐसे में आनन फानन में अधिकारियों ने आवासन मंडल से सम्पर्क किया और आवासन मंडल के अधिकारियों ने पांच मई को शिप्रा पथ थाने को कर्मचारियों का धरना हटाने के लिए पत्र लिखा। एक साथ दो दो गड़बडिय़ों को देखते हुए अंत में विभागीय अधिकारियों ने कार्यक्रम ही निरस्त करने का निर्णय लिया।
इनका कहना है,
सॉफ्टवेयर पर डाटा फीडिंग का काम पूरा नहीं हो पाया था, जो डाटा फीड किया गया था वह भी पूरी तरह से मैच नहीं हो रहा था, पशुपालकों को भुगतान गलत नहीं हो जाए इसे ध्यान में रखते हुए हमने कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। जहां तक जगह की बात है तो तय नहीं की गई थी कि कार्यक्रम कहां पर होगा।
कृष्ण कुणाल, प्रमुख शासन सचिव
पशुपालन विभाग।
Published on:
10 May 2023 08:22 pm
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