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Ankita Bhandari murder case: भंवरी की तरह अंकिता की हत्या, मंत्री Vinod Arya के बेटे ने लाश लगाई ठिकाने

राजनीतिक रसूख में मंत्रियों की मनमानी हो या फिर बेटा का सिरफिर होना कोई बड़ी बात नहीं दिखाई देती है। भारत के राजनीति इतिहास में पहले भी इन राजनीतिज्ञों ने जघन्य अपराध किए हैं। फिर चाहे राजस्थान के भंवरी देवी का मामला हो या फिर उत्तर प्रदेश की मधुमिता शुक्ला का। रसूख में शारीरिक संबंध बनाना, शोषण करना और उसके राजफांस होने के डर से हत्या करना राजनीतिज्ञों को शगल सा बन गया है। पहले ये खुद रहते थे अब उनके मद में अंधे बेटे ऐसी घटना को अंजाम दे रहे हैं। उत्तराखंड की अंकित इस श्रृंखला का अंत तो कतई नहीं दिखाई देती हैं क्यांेकि ये सब ऐसा करने के बाद भी जेल में घर बना लेते हैं। गोरखपुर मेडिकल कालेज में अमरमणि और उनकी पत्नी कितने दिन तक रहीं और उन्हें क्या मर्ज है यह आज भी कोई पूछ नहीं सकता है और न ही

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देवभूमि उत्तराखंड के पूर्व मंत्री विनोद आर्य के पुत्र को अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder) के आरोप में दो साथियों सहित जेल भेज दिया गया है। इतना ही नहीं मंत्री (Vinod Arya) के रिसोर्ट को भी जमींदोज कर दिया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने विशेष जांच टीम का गठन करके इस हत्याकांड की तह तक जाने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मंत्री विनोद आर्य को निलंबित कर दिया है। मंत्री आर्य के बेटे पुलकित को भी बोर्ड से हटा दिया गया है।

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17 सितंबर से गायब हुई थी अंकिता
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य के रिसोर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी 17 सितंबर से गायब हो गई थी। यह बात जब परिजनों को पता चली तो उन्होंने पुलिस में उसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो अंकिता रिसार्ट से लेकर ऋषिकेश तक मंत्री के बेटे पुलकित आर्य और उसके मैनेजर सौरभी भास्कर और साथ में अंकित उर्फ पुलकित गुप्ता के साथ ऋषिकेश गए थे।

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मंत्री के बेटे ने कबूली हत्या
सीसीटीवी फुटेज को लेकर जब तीनों से पूछताछ शुरू की तो पहले तो मंत्री पुत्र ने कहानी गढ़ी लेकिन बाद में अंकिता की हत्या को स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि जब मंत्री पुत्र ने उसके साथ कुछ अनैतिक करने का प्रयास किया और उसे अनैतिक धंधे में उतारने की कोशिश की तो फिर उसने पूरे रिसार्ट में चल रहे गोरखधंधे को दुनिया के सामने लाने की बात कह दी। इसके बाद फिर तीनों ने मिलकर अंकिता की हत्या की और गंगा में फेंक दिया। जांच में पुलकित ने यह बात स्वीकार की है कि वह अंकिता पर रिसोर्ट में आने वाले लोगों के साथ अनैतिक संबंध बनाने पर दबाव डालता था। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। पुलिस ने अंकिता साहू का पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया है।

रिसोर्ट में लगाई लोगों ने आग
इस मामले को लेकर महिलाएं और पुरुष सड़कों पर उतर आए। पुलिस तीनों आरोपियों को जब लेकर जा रही थी तो महिलाओं ने पुलिस के वाहन को घेर लिया और तोड़फोड़ करते हुए तीनों आरोपियों की पुलिस की मौजूदगी में ही पिटाई कर दी गुस्साए लोगों ने रिसोर्ट में आग लगा दी प्रशासन ने देर रात को ही रिसोर्ट को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया।

गया पूर्व मंत्री का पद
इस घटना के बाद पुलकित आर्य के भाई और पिता विनोद आर्य को पद से हटा दिया गया है। आर्य भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी भी थे । पुलकित के भाई अंकित आर्य को उत्तराखंड ओबीसी कल्याण आयोग के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है उसे राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था और इस घटना से नाराज लोगों ने स्थानीय भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की गाड़ी के कांच फोड़ दिया।

राजस्थान का भंवरी कांड
अंकिता की हत्या कुछ कुछ राजस्थान की भंवरी देवी हत्याकांड जैसा है। जिसमें सियासत, रियासत, रसूख और साजिश के पूरे तार जुड़े नजर आ रहे है। विनोद आर्य की सियासत ऐसी थी कि उत्तराखंड उसकी रियासत बन चुकी थी। रसूख ऐसा कि उसका बेटा रिसोर्ट में अनैतिक धंधा चला रहा था। इतना ही उसके बेटे पुलकित आर्य ने अंकिता की हत्या कर दी क्योंकि वह उसके धंधे में नहंी उतरना चाहती थी। वहीं 2011 में भंवरी देवी एक मामूली नर्स से मंत्री के चहेती बनी और ऐसी राजदार की मंत्री महिपाल मदेरणा ने अपने साथियों के साथ हत्या करके उसका शव जलवा दिया और राख नदी में फिकंवा दी। अंकिता में मामले में भी ऐसा है कि वह अनैतिक कार्य की राजदार थे और उसने भी भंवरी की तरह उसे खोलने की धमकी आरोपियों को दी। इसके बाद उसकी हत्या कर शव गंगा बहा दिया। उत्तर प्रदेश के मंत्री रहे अमरमणि की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने भी अवैध संबंधों की राजदार मधुमिता शुक्ला की हत्या करा दी थी क्यों वह उनके बच्चें को जन्म देने वाली थी।