18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अपेक्स बैंक के मनमाने फरमान, कॉपरेटिव बैंकों को नुकसान

जीएसएस को अग्रिम ब्याज अनुदान राशि दिए जाने के निर्देशसहकारी बैंकों को देनी होगी अग्रिम ब्याज अनुदान राशिनिर्देश का विरोध, कॉपरेटिव बैंकों को होगा नुकसान

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

Dec 17, 2020

अपेक्स बैंक के मनमाने फरमान, कॉपरेटिव बैंकों को नुकसान

अपेक्स बैंक के मनमाने फरमान, कॉपरेटिव बैंकों को नुकसान

सहकारी बैंकों की ओर से ग्राम सेवा सहकारी समितियों को 2 फीसदी अग्रिम भुगतान राशि उपलब्ध करवाए जाने के अपेक्स बैंक के निर्देश को लेकर विरोध के स्वर उठने शुरू हो गए हैं। अपेक्स बैंक जयपुर के इस निर्देश का ऑल राजस्थान कॉपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन और राजस्थान कॉपरेटिव बैंक ऑफिसर एसोसिएशन की श्रीगंगानगर यूनिट ने विरोध किया है। दोनों ही यूनियनों का कहना है कि यदि बैंक ऐसा करते हैं तो उन्हें किसानों को कर्ज देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। गौरतलब है कि हाल ही में अपेक्स बैंक जयपुर ने निर्देश जारी किए थे कि सहकारी बैंक ग्राम सेवा सहकारी समितियों को 2 फीसदी अग्रिम ब्याज भुगतान उपलब्ध करवाएं।

रजिस्ट्रार को भेजा ज्ञापन, आदेश वापस लेने की मांग
ऑल राजस्थान कॉपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन और राजस्थान कॉपरेटिव बैंक ऑफिसर एसोसिएशन की श्रीगंगानगर यूनिट की ओर से इस संबंध में रजिस्ट्रार को ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में केंद्रीय सहकारी बैंक को होने वाले वित्तीय नुकसान का हवाला देते हुए ग्राम सेवा सहकारी समितियों को 2 फीसदी अग्रिम ब्याज भुगतान की राशि अपेक्स बैंक द्वारा सीसीबी को उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। ऑफिसर्स एसोसिएशन के सचिव महेश सिरोही और एम्पलाइज यूनियन के सचिव राजेश शर्मा ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन भेजकर बताया है कि श्रीगंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक ने अपेक्स बैंक जयपुर के एक पत्र के आधार पर जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों को 2 फीसदी अग्रिम ब्याज भुगतान उपलब्ध करवाने के लिए समस्त शाखा को निर्देशित किया है जो कि बैंक के आर्थिक हितों के विपरीत है।
बैंक का नुकसान: लाइसेंस हो सकता है निरस्त
गौरतलब है कि अल्पकालीन फसली ऋण का समय पर चुकाया करने के लिए राज्य सरकार की ओर से 4 फीसदी और केंद्र की ओर से 3 फीसदी ब्याज अनुदान राशि अपेक्स बैंक के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती है लेकिन यह राशि समय पर बैंकों को नहीं मिल रही। केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाले 25.86 करोड़ और राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले 14.80 करोड़ रुपए बैंक को नहीं मिले हैं। ऐसे में यदि बैंक 2 फीसदी ब्याज अग्रिम करता है तो बैंक की तरलता प्रभावित होगी। ऑफिसर्स एसोसिएशन के सचिव महेश सिरोही का कहना है कि ऐसे में बैंकों को किसानों को कर्ज देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। तरलता उपलब्ध का सीधा प्रभाव बैंक की सीआरएआर और सीआरआर पर पड़ता है और ऐसे में बैंक डिफॉल्टर हो जाता है तो आरबीआई की ओर से बैंक के विरूद्ध शास्ति लगाई जा सकती है साथ ही लाइसेंस भी निरस्त हो सकता है।

अपेक्स बैंक के पत्र पर रोक लगाने की मांग
इन दोनों कर्मचारी नेताओं ने अपेक्स बैंक के पत्र पर रोक लगाए जाने की मांग की है और कहा है कि यदि शीर्ष बैंक के इस पत्र से सीसीबी को वित्तीय नुकसान होता है तो उसके लिए शीर्ष बैंक की जवाबदेही निश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रदेश के कुछ केंद्रीय सहकारी बैंक अभी तक 14वें और 15वें वेतन समझौते से और कई बैंक समझौता अवधि के एरियर से वंचित हैं। ऐसे में बैंक कार्मिकों को उनके वाजिब हक से दूर रखते हुए समितियों को 2 फ़ीसदी ब्याज अनुदान राशि अग्रिम दिया जाना न्याय संगत नहीं है।

यूनियन की ओर से रखी गई अन्य मांगें
: फसली ऋण पुर्नभरण में यदि बैंक डिफॉल्ट होता है तो शीर्ष बैंक द्वारा लिए जाने वाले पैनल ब्याज 3 से 4 फीसदी को एक फीसदी किया जाए।
: नाबार्ड द्वारा फसली ऋण वितरण पर 40 फीसदी पुर्नभरण किया जाता है। शेष 60 फीसदी राशि बैंक की उच्च ब्याजदर की होती है। समितियों को दी जाने वाली मूल ऋण राशि में से 60 फीसदी उच्च ब्याज दर की राशि है। इस राशि पर 2 प्रतिशत की दर से समितियों को एडवांस ब्याज अनुदान देना बैंक के लिए नुकसानदायक होगा। ऐसे में 2 फीसदी राशि शीर्ष बैंक से समितियों से दिलवाई जाए।
: सीसीबी का फसली ऋण मार्जन प्रतिशत भी शीर्ष बैंक से एडवांस में दिलवाया जाए।
: शीर्ष बैंक में सीसीबी का जमा आधिक्य हिस्सा राशि लौटाई जाए।
: सरकार से बकाया ऋण माफी योजना का बकाया 8 फीसदी ब्याज जल्द दिलवाया जाए।
: बैंक कार्मिकों को भी 9,18, 27 का लाभ दिया जाए।