
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज (शुक्रवार 3 मई 2024) अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनके परिवार जन, शुभचिंतक, कांग्रेस पार्टी नेता-कार्यकर्ता के अलावा अन्य राजनीतिक दलों और विभिन्न क्षेत्रों की शख्सियतें भी उन्हें जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं दे रहे हैं। हर कोई उनकी दीर्घायु और स्वस्थ जीवन को लेकर ईश्वर से कामना कर रहा है।
वैसे अशोक गहलोत के राजनीतिक कद का अंदाज़ा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि वे राजस्थान के तीन बार (1998-2003, 2008-2013, 2018-2023) मुख्यमंत्री रहने के अलावा जोधपुर की सरदारपुरा विधानसभा सीट से 1999 से अब तक 6 बार विधायक, जोधपुर लोकसभा सीट से दो बार (1991-1999, 1980-1989) सांसद और तीन बार राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं।
गहलोत तत्कालीन यूपीए सरकार के दौरान केंद्र में (स्वतंत्र प्रभार) टेक्सटाइल मंत्री (1991-1993), पर्यटन एवं सिविल एविएशन मंत्री (1984-1984) और खेल मंत्रालय में उप मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा भी वे कई पदों पर अपनी सेवाएं बखूबी अंदाज़ में पेश कर चुके हैं।
गहलोत के लंबे राजनीतिक सफर के चलते वे आज 'दिग्गज' की श्रेणी में होकर अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गहलोत अपने करियर का पहला ही विधानसभा चुनाव हार गए थे।
दरअसल, अशोक गहलोत ने अपना पहला विधानसभा चुनाव राजस्थान के जोधपुर की सरदारपुरा विधानसभा सीट से वर्ष 1977 में लड़ा था। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने अपना पूरा ज़ोर भी लगाया था, यहां तक कि चुनाव में खर्चे के लिए उन्होंने अपनी एक मोटर साइकिल तक बेच दी थी। लेकिन वे ये चुनाव हार गए थे।
गहलोत को उनके करियर का पहला चुनाव हरवाने वाले नेता थे माधव सिंह। जनता पार्टी के उम्मीदवार माधव सिंह ने अशोक गहलोत को करीब साढ़े 4 हज़ार वोटों से शिकस्त दी थी।
गहलोत ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 1977 के विधानसभा चुनाव के दौरान वो पहली और आखिरी बार था जब अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा था। तब उनकी उम्र सिर्फ 25 साल के आसपास थी और यूथ कांग्रेस में सक्रीय थे। लेकिन पहला चुनाव हारने के बाद भी कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर जो ज़िम्मेदारी मिलती रही उसे निभाते रहे।
1977 के चुनाव में सिर्फ अशोक गहलोत हारे, ऐसा नहीं था। कांग्रेस पार्टी के कई उम्मीदवारों को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। कुल 200 विधानसभा सीटों में से 152 सीटें जीतकर जनता दल पार्टी, राजस्थान में पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस को इस चुनाव में सिर्फ 41 सीटें जीतकर ही संतोष करना पड़ा था। इसके अलावा सीपीआई और सीपीएम ने 1-1 और 5 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव जीता था।
वो 1977 का ही राजस्थान विधानसभा चुनाव था जब राजस्थान में पहली बार गैर-कांग्रेस सरकार सत्ता में आई। इस साल जनता दल यहां सरकार बनाने में सफल हुई। जबकि छाबड़ा विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे भैरोसिंह शेखावत प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
Published on:
03 May 2024 02:45 pm

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