
जयपुर/नई दिल्ली।
प्रदेश में नवंबर में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस सरकार अपने फैसले को वापस लेगी। अब निकाय प्रमुख बनने के लिए पार्षद नहीं होने की शर्त को हटाया जाएगा। राजस्थान के प्रदेश प्रभारी और महासचिव अविनाश पांडे ने दिल्ली में बुधवार को ये संकेत दिए हैं।
पांडे ने कहा है कि निकाय प्रमुख बनने के लिए सरकार अब पार्षद नहीं होने के नियम को हटाएगी। संगठन ने निर्णय कर दिया है कि अब सरकार नियम संशोधन करेगी। ये बात उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से बात करने के बाद कही है।
पांडे ने की राज्य के नेताओं से मंत्रणाप्रभारी महासचिव महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का मतदान खत्म होने के बाद दिल्ली आए थे। पांडे ने इस बारे में राजस्थान के नेताओं से मंत्रणा की। पांडे ने सीएम गहलोत, डिप्टी सीएम पायलट और मंत्री धारीवाल से संपर्क किया।
नियम नया नहीं... 2009 से ही लागू
पांडे ने बुधवार को बताया कि पार्षद नहीं होने के बावजूद निकाय अध्यक्ष का चुनाव लडऩे का नियम नया नहीं बनाया गया है। यह 2009 से ही लागू था, लेकिन किसी का इस पर ध्यान नहीं गया था। अब जबकि यह मामला सामने आया और डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने जनता की आवाज उठाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं बताया। ऐसे में सभी नेताओं से वार्ता की गई। सरकार अब इस नियम को वापस लेने पर सहमत है। जल्द ही इसमें संशोधन किया जाएगा।
पायलट सहित कुछ मंत्री भी जता चुके हैं विरोध
गौरतलब है कि सबसे पहले परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और खाद्य व आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा भी इसको लेकर विरोध जता चुके हैं। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने इस नियम का विरोध किया था और कहा था कि बगैर पार्षद बनें निकाय प्रमुख बनने का निर्णय व्यवहारिक नहीं है और इसे लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता हैं। इस बारे में दुबारा विचार होना चाहिए। खाद्य मंत्री रमेश मीणा तो इसको लेकर दिल्ली तक पहुंच गए थे और अपनी सरकार के निर्णय की शिकायत की थी।
पायलट से मिले धारीवाल, बोले- कैबिनेट ही करेगी फैसला
इधर, राज्य में निकाय प्रमुख के चुनाव में किए गए बदलाव को लेकर बुधवार को उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने मुलाकात की। पायलट के आवास पर दोनों के बीच करीब आधा घंटे से अधिक बातचीत हुई। बैठक में पायलट ने नई तरीके से निकाय प्रमुख का चुनाव कराए जाने पर आपत्ति जताई।
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि बैठक में हमने अपना पक्ष रख दिया है। नया मॉडल हम नियमों के अनुरूप लेकर आए हैं। इसमें हमने किसी भी तरह का कोई फेरबदल नहीं किया है। 2009 में सरकार इस विधेयक को पारित कर चुकी है। अब सरकार और कैबिनेट ही इस पर कोई फैसला करेगी। हमने बैठक में अपनी बात रख दी है।
लगातार बयान और फैसले बदलने से हो रही किरकरी कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सरकार ने निकाय प्रमुखों के चुनाव प्रत्यक्ष रूप से करने का ऐलान किया। अक्टूबर में सरकार ने कहा कि जनता नहीं, पार्षद ही चुनेंगे अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। अगले दिन सरकार ने कहा कि पार्षद का चुनाव जीते बिना भी निकाय प्रमुख की कुर्सी मिल सकेगी। इस फैसले के बाद से पार्टी के अंदर ही बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। भाजपा भी हमलावर हो गई।
Updated on:
24 Oct 2019 08:09 am
Published on:
24 Oct 2019 08:06 am

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