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अष्टमी पर विशेष : देश का पहला ऐसा मंदिर जहां शिव के साथ शक्ति की प्रतिमा, शहर स्थापना से पहले का 300 साल पुराना मंदिर

शक्ति स्वरूपा मां जगदंबा (Maa Jagdamba) की आस्था देवी मंदिरों से लेकर घर-घर में परवान पर है। शहर में एक ऐसा भी मंदिर है जहां महादेव (Lord Shiva) की समक्ष मां पार्वती (Maa Parvati) नहीं बल्कि दुर्गामाता (Durga Mata) विराजमान है। शहर की उत्तर दिशा में मनोरम पहाड़ियों के बीच गढ़ गणेश के नीचे स्थित अति प्राचीन शिवालय गैटेश्वर शहर की स्थापना से पहले का अनूठा 300 साल से अधिक साल पुराना मंदिर है।

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जयपुर. शक्ति स्वरूपा मां जगदंबा (Maa Jagdamba) की आस्था देवी मंदिरों से लेकर घर-घर में परवान पर है। शहर में एक ऐसा भी मंदिर है जहां महादेव (Lord Shiva) की समक्ष मां पार्वती (Maa Parvati) नहीं बल्कि दुर्गामाता (Durga Mata) विराजमान है। शहर की उत्तर दिशा में मनोरम पहाड़ियों के बीच गढ़ गणेश के नीचे स्थित अति प्राचीन शिवालय गैटेश्वर शहर की स्थापना से पहले का अनूठा 300 साल से अधिक साल पुराना मंदिर है। मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारियों के मुताबिक यहां स्थित गैटोर गांव में रह रहे राजपरिवार के सेवकों ने इस मन्दिर की स्थापना की थी।

कुछ समय बाद राजपरिवार ने इस स्थान को जगह लेकर जगतपुरा के पास गैटोर गांव मे बसाया और इस जगह को राजपरिवार मोक्षधाम बनाया गया। यहां आम मंदिर की तरह भगवान शिव के साथ पार्वती व नंदी नहीं बल्कि दुर्गा और शेर विराजमान है। मंदिर प्रबधन का दावा है कि यह देश मे पहला शिव मंदिर है जहां पार्वती और नंदी नहीं है। सदियों पुराने इस शिवालय में भगवान शिव के साथ अष्टभुजा वाली मां शक्ति और नंदी के स्थान पर शेर की प्रतिभा स्थापित है।


ऐसे समझें अहमियत
शिव शक्ति के उपासक अपनी विशेष मनोकामना के लिए नवरात्र, श्रावण, महाशिवरात्रि में बड़ी संख्या मे यहां पूजा अर्चना करते हैं। गौरतलब है कि दुर्गा को माता पार्वती का शक्ति स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि शिव के साथ दुर्गा स्वरूप की पूजा दुर्लभ होती है। दावा है कि दुर्लभ संयोग देश में किसी भी शिवालय में नहीं है। शक्ति और तांत्रिक सिद्धियों को प्राप्त करने के उद्देश्य से मंदिर विशेष महत्व है। मंत्री ओपी चांडक ने बताया कि शिव परिवार में गणेश जी के स्थान पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है।


करवाया जीर्णोद्धार
लगभग 55 वर्ष पूर्व जयपुर के कुछ शिव भक्तों ने गैटेश्वर कला संस्थान का गठन कर इस जीर्ण शीर्ण मन्दिर का जीर्णोद्धार कराया। राजस्थान दिवस से लेकर अन्य उत्सव यहां मनाए जा रहे हैं। रोजाना विशेष श्रृंगार किया जाता हैं