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Ashtavinayak In Moti Dungri Ganesh Ji Mandir: जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश जी मंदिर में गुरुवार से भक्तों को आस्था और अध्यात्म का नया अनुभव दिखेगा। गर्भगृह में चांदी के 11 किलो वजनी दरवाजों पर देशभर के अष्टविनायकों की झलक देखने को मिलेगी। पारंपरिक कलात्मक पेंटिंग के साथ ही सखियों की आकृतियां और सूक्ष्म नक्काशी के भी दर्शन होंगे। 15 फीट बाय 12 फीट आकार के इन दरवाजों को तैयार करने में तीन महीने का समय लगा। महंत ने बताया कि अब रात में परछाई सीधी भगवान गणेश पर नहीं आएगी।
मोतीडूंगरी मंदिर में गर्भगृह के बाद छतों पर ही सोने की कोटिंग का कार्य किया जा रहा है। अब तक गर्भगृह में करीब एक किलो तथा बाहरी हिस्सों में सात किलो सोने का वर्क पूरा हो चुका है। गौरतलब है कि पुणे क्षेत्र में लगभग 56 कोस के दायरे में स्थित अष्टविनायक भगवान गणेश के आठ प्राचीन और स्वयंभू मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र माने जाते हैं। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति और चमत्कारिक विश्वास से जुड़ी परंपरा है।
यहां भगवान गणेश ने मोर पर सवार होकर 'सिंधु' नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इन्हें मयूरेश्वर कहा जाता है।
इस स्थान पर भगवान विष्णु ने सिद्धियों को प्राप्त किया था। बप्पा का वह जो भक्तों को हर कार्य में सफलता और सिद्धि प्रदान करता है।
एकमात्र ऐसा विनायक मंदिर है जो एक भक्त (बल्लाल) के नाम पर प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार, बप्पा अपने इस भक्त की पुकार सुनकर स्वयं यहां प्रकट हुए थे।
वरद का अर्थ है वरदान देने वाला। इस मंदिर में बप्पा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और उन्हें मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं।
इस रूप में भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी चिंताओं और मानसिक परेशानियों को हर लेते हैं और उन्हें शांति प्रदान करते हैं।
यह मंदिर पहाड़ों पर एक गुफा में स्थित है। 'गिरिजात्मज' का अर्थ है गिरिजा (माता पार्वती) के पुत्र। यहां माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर बाल गणेश को प्राप्त किया था।
भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। इस रूप में उन्होंने 'विघ्नासुर' नामक राक्षस का संहार किया था और भक्तों को सभी बाधाओं से मुक्त किया था।
यह अष्टविनायक का सबसे शक्तिशाली और उग्र रूप है। इसी रूप में भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने से पहले गणेश जी की पूजा की थी
Updated on:
21 May 2026 07:06 am
Published on:
21 May 2026 07:06 am
