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Jaipur: मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 11KG चांदी के दरवाजों पर आज से होंगे अष्टविनायक के दर्शन, 3 महीनों में किया तैयार

Rajasthan News: जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गुरुवार से भक्तों को भक्ति और कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। गर्भगृह में लगाए गए 11 किलो चांदी के भव्य दरवाजों पर देशभर के अष्टविनायक गणेश के दिव्य स्वरूप उकेरे गए हैं, जिन्हें तैयार करने में कलाकारों को तीन महीने का समय लगा।

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जयपुर

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Akshita Deora

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गौरव शर्मा

May 21, 2026

Moti Dungri Ganesh Mandir

फोटो: पत्रिका

Ashtavinayak In Moti Dungri Ganesh Ji Mandir: जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश जी मंदिर में गुरुवार से भक्तों को आस्था और अध्यात्म का नया अनुभव दिखेगा। गर्भगृह में चांदी के 11 किलो वजनी दरवाजों पर देशभर के अष्टविनायकों की झलक देखने को मिलेगी। पारंपरिक कलात्मक पेंटिंग के साथ ही सखियों की आकृतियां और सूक्ष्म नक्काशी के भी दर्शन होंगे। 15 फीट बाय 12 फीट आकार के इन दरवाजों को तैयार करने में तीन महीने का समय लगा। महंत ने बताया कि अब रात में परछाई सीधी भगवान गणेश पर नहीं आएगी।

ऐसे तैयार हुए

  • कलाकार सत्यनारायण कश्यप ने बताया कि
  • डिजाइन की ड्राइंग तैयार कर उसे धातु पर उकेरा।
  • चांदी की परत को विशेष तकनीक से दरवाजे पर चढ़ाया।
  • अष्टविनायक सहित सखियों के चित्रों को जीवंत रूप दिया गया।
  • तीन महीने पहले काम की शुरुआत।
  • पांच से छह जनों की टीम रोजाना पांच से छह घंटे काम में जुटी रही।

मोतीडूंगरी मंदिर में गर्भगृह के बाद छतों पर ही सोने की कोटिंग का कार्य किया जा रहा है। अब तक गर्भगृह में करीब एक किलो तथा बाहरी हिस्सों में सात किलो सोने का वर्क पूरा हो चुका है। गौरतलब है कि पुणे क्षेत्र में लगभग 56 कोस के दायरे में स्थित अष्टविनायक भगवान गणेश के आठ प्राचीन और स्वयंभू मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र माने जाते हैं। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति और चमत्कारिक विश्वास से जुड़ी परंपरा है।

वैल्यू एडिशन मयूरेश्वर (मोरगांव, पुणे)

यहां भगवान गणेश ने मोर पर सवार होकर 'सिंधु' नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इन्हें मयूरेश्वर कहा जाता है।

सिद्धिविनायक (सिद्धटेक, अहमदनगर)

इस स्थान पर भगवान विष्णु ने सिद्धियों को प्राप्त किया था। बप्पा का वह जो भक्तों को हर कार्य में सफलता और सिद्धि प्रदान करता है।

श्री बल्लालेश्वर (पाली, रायगढ़)

एकमात्र ऐसा विनायक मंदिर है जो एक भक्त (बल्लाल) के नाम पर प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार, बप्पा अपने इस भक्त की पुकार सुनकर स्वयं यहां प्रकट हुए थे।

वरदविनायक (महाड, रायगढ़)

वरद का अर्थ है वरदान देने वाला। इस मंदिर में बप्पा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और उन्हें मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं।

चिंतामणि (थेऊर, पुणे)

इस रूप में भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी चिंताओं और मानसिक परेशानियों को हर लेते हैं और उन्हें शांति प्रदान करते हैं।

गिरिजात्मज (लेण्याद्री, पुणे)

यह मंदिर पहाड़ों पर एक गुफा में स्थित है। 'गिरिजात्मज' का अर्थ है गिरिजा (माता पार्वती) के पुत्र। यहां माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर बाल गणेश को प्राप्त किया था।

विघ्नेश्वर (ओझर, पुणे)

भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। इस रूप में उन्होंने 'विघ्नासुर' नामक राक्षस का संहार किया था और भक्तों को सभी बाधाओं से मुक्त किया था।

महागणपति (राजणगांव, पुणे)

यह अष्टविनायक का सबसे शक्तिशाली और उग्र रूप है। इसी रूप में भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने से पहले गणेश जी की पूजा की थी