
टोंक. बनास में खड़े बजरी के वाहन। फोटो पत्रिका
Rajasthan Gravel Crisis : राजस्थान में बजरी संकट अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगा है। सीमित खनन, बढ़ती मांग और अवैध कारोबार के चलते बजरी के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। हालात यह है कि एक फीट बजरी 70 से 75 रुपए तक बिक रही है, जिससे आम परिवारों और छोटे बिल्डरों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इससे घर बनाना लगातार महंगा होता जा रहा है।
राजस्थान में अभी केवल 67 बजरी खाने ही संचालित है, जबकि सबसे बड़े भंडार वाले कई जिलों में खनन पर रोक लगी हुई है। ऐसे में आपूर्ति की कमी से संकट और गहरा गया है। खान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रदेश में 500 से अधिक बजरी खानें संचालन में आ जाएं तो कीमतें घटकर 30 से 35 रुपए प्रति फीट तक आ सकती है। केवल 67 बजरी खानें ही संचालित होने से मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। बजरी माफिया की सक्रियता के कारण कीमतें कम करने के प्रयास बेअसर साबित हो रहे हैं। वैसे प्रदेश में सालाना 750 लाख टन बजरी की मांग है।
खान विभाग ने बजरी संकट कम करने के लिए अब तक 249 खानों की नीलामी की है। इनमें से 75 खानों को पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र (ईसी) मिल चुका है, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण केवल 47 नई खानें ही संचालन में आ पाई हैं।
खान विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल प्रतिदिन 4 हजार से अधिक ट्रक बजरी की खपत हो रही है। इनमें करीब 2500 ट्रक नदी की बजरी और 1500 ट्रक एम-सैंड बाजार में पहुंच रही है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में अवैध खनन जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए नदियों से अवैध बजरी निकासी लगातार हो रही है।
बनास नदी क्षेत्र में टोंक, सवाई माधोपुर, अजमेर और भीलवाड़ा जिले प्रदेश में बजरी के सबसे बड़े भंडार वाले क्षेत्र माने जाते हैं। लेकिन इन्हीं इलाकों में खनन पर फिलहाल प्रतिबंध लगे हुए हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने 91 खानों को निरस्त कर दिया।
प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे भवन निर्माण कार्यों के कारण बजरी की सालाना मांग करीब 750 लाख टन तक पहुंच चुकी है। इसके मुकाबले खनन के स्रोत पर्याप्त संख्या में विकसित नहीं हो पाए हैं। वर्तमान में संचालित 67 खानों में 20 पुरानी खानें हैं, जबकि 47 नई खानें ही हाल के वर्षों में शुरू हो सकी हैं। मांग अधिक और उपलब्धता कम होने से कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं।
सरकार ने नई खानों की नीलामी में रॉयल्टी की अधिकतम चार गुना दर तय कर कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। इसके अनुसार नदी से एक टन बजरी की औसत कीमत करीब 200 रुपए पड़नी चाहिए, लेकिन सीमित खानें और बाजार में माफियाओं की पकड़ के कारण यही बजरी ट्रक भाड़ा और टोल जोड़कर जयपुर में 1300 से 1500 रुपए प्रति टन तक बिक रही है। खुदरा बाजार में आम आदमी को यही बजरी 70 से 75 रुपए प्रति फीट के हिसाब से खरीदनी पड़ रही है।
Published on:
21 May 2026 07:24 am
