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फ्लायर:: डीसा में बनेगी एशिया की पहली रेगिस्तान थीम वाली नाइट सफारी

जयपुर

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Newsdesk

Aug 13, 2026

Rajasthan

अहमदाबाद. गुजरात के बनासकांठा जिले के डीसा में एशिया की पहली रेगिस्तान थीम आधारित ड्राइव-थ्रू नाइट सफारी और विश्वस्तरीय जूलॉजिकल पार्क का निर्माण होगा। इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) ने मंजूरी दे दी है। गुजरात वन विभाग की ओर से विकसित की जा रही इस परियोजना पर करीब 542.14 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि प्रस्तावित डीसा ‘डेजर्ट जूलॉजिकल पार्क तथा नाइट सफारी’ पुराने डीसा में लगभग 103 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगी। यह परियोजना सेंट्रल जू अथॉरिटी के दिशानिर्देश के अनुसार तैयार होगी। परियोजना वन्यजीव संरक्षण के साथ उत्तर गुजरात में ईको-टूरिज्म और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि इस प्राणी संग्रहालय को एक आधुनिक संरक्षण सुविधा के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें लगभग 83 प्रजातियों के करीब 2700 देशी एवं विदेशी पशु-पक्षियों को रखा जाएगा। यह परियोजना आगंतुकों को वन्यजीवों के अनूठे अनुभवों के साथ-साथ संरक्षण, प्रजनन, वन्यजीव रेस्क्यू, पुनर्वास, पर्यावरणीय शिक्षा और प्रकृति के वैज्ञानिक अर्थघटन के एक केन्द्र के रूप में भी काम करेगी। डीसा में बन रहा यह जू एशिया का पहला डेजर्ट थीम आधारित जू होगा। यह विश्व का इस प्रकार का तीसरा डेजर्ट-थीम जू होगा और विश्व का चौथा नाइट सफारी जू बनेगा।

Bरात में खुलेगा जंगल का नया संसारB

परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण नाइट सफारी होगी। सूर्यास्त के बाद पर्यटक विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़ों में रात्रिचर वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे। अलग डे जू के साथ नाइट सफारी के लिए पांच विशेष बाड़े बनाए जाएंगे।
BB

Bचिंकारा से एशियाई शेर तक दिखेंगेB

मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. जयपाल सिंह के अनुसार पार्क की थीम रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र पर आधारित होगी। यहां चिंकारा, काला हिरण, भारतीय जंगली गधा, एशियाई शेर और तेंदुए सहित विभिन्न वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार होगा। शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के लिए अलग-अलग बाड़े, पक्षीशाला, सरीसृप गृह, तितली पार्क जैसी सुविधाएं भी विकसित होंगी। रेप्टाइल सफारी, रेनफॉरेस्ट बायोम और एक्वेरियम भी आकर्षण होंगे।
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Bभारतीय रेगिस्तान के वन्यजीवों के साथ विदेशी प्रजातियां भीB

जूलॉजिकल पार्क में भारतीय रेगिस्तानी क्षेत्र के कई वन्यजीव देखने को मिलेंगे। इनमें भारतीय साही, खरगोश, हेजहॉग, रेगिस्तानी खरगोश, जंगली गधा, स्लॉथ भालू, कैराकल, भेड़िया, सुनहरा सियार, धारीदार लकड़बग्घा और रेगिस्तानी लोमड़ी शामिल हैं। अफ्रीकी रेगिस्तान की थीम से जुड़े वन्यजीव भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होंगे। इनमें अंगोला जिराफ, ग्रेवी जेब्रा, स्किमिटर ऑरिक्स, कुडू, स्प्रिंगबॉक, अड्रा गजेल, काला गैंडा, चिंपैंजी, मीरकैट, चीता, शेर, फेनेक लोमड़ी, बैट-ईयर्ड फॉक्स और शुतुरमुर्ग शामिल होंगे। ऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तानी क्षेत्र की प्रजातियों में कंगारू, एमू और वॉलेबी भी आकर्षण बढ़ाएंगे।

Bवडनगर-अंबाजी-नडाबेट पर्यटन सर्किट को मिलेगा फायदाB

बनासकांठा वाइल्डलाइफ डिवीजन के उप वन संरक्षक पोपटराव गारडी के अनुसार वडनगर, अंबाजी और नडाबेट जैसे पर्यटन स्थलों के साथ यह प्राणी संग्रहालय उत्तर गुजरात का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण बनेगा। यह जू वन्यजीव संरक्षण एवं इको-टूरिज्म के लिए एक फ्लैगशिप डेस्टिनेशन बनेगा। इससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।

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