
किसके इशारे पर हो रही है श्रीराम मंदिर ट्रस्ट पर सियासत
किसके इशारे पर हो रही है श्रीराम मंदिर ट्रस्ट पर सियासत
पहले दलित को पुजारी बनाने की मांग
अब ट्रस्ट में ओबीसी सदस्य को लेकर बयानबाजी
ऐसा क्यों कर रहे हैं संघ—भाजपा से जुड़े लोग
क्या खुद की मर्जी से कर रहे हैं मांग
या किसी के इशारे पर हो रही है राजनीति
अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को संसद में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ऐलान के साथ ही ट्रस्ट के सदस्यों को लेकर सियासत शुरू हो गई। ट्रस्ट की घोषणा के तुरंत बाद अयोध्या के अयोध्या की तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने चंदौली में दलित को पुजारी बनाने तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को ट्रस्ट का संरक्षक बनाने की मांग पर चंदौली में अनशन शुरू कर दिया। उनकी मांग पूरी नहीं हुई, उससे पहले ही भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं ने मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों में ओबीसी के सदस्य को शामिल करने की मांग उठा दी।
आपको बता दें कि महंत परमहंस दास अयोध्या से माघ महीने में प्रयागराज में संगम स्नान के लिए गए थे। प्रयाग के बाद वाराणसी में गंगा स्नान के बाद बुधवार को वह चंदौली के बिलारीडीह शिव मंदिर पर पहुंचे। वहीं उन्हें दोपहर में संसद में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की सूचना मिली तो उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहनभागवत को इस ट्रस्ट का संरक्षक बनाने और दलित की मांग को लेकर अनशन की शुरू कर दिया। शुक्रवार को अयोध्या के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और डिप्टी एसपी ने उन्हें गाय का दूध पिलाकर अनशन समाप्त करा दिया। महंत ने इससे पहले उन्हें ज्ञापन सौंपा तथा रामराज्य की स्थापना के लिए हवन और यज्ञ करके दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जीत का आशीर्वाद भी दे दिया। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि अनशन, मंदिर में दलित पुजारी और संघ प्रमुख को संरक्षक बनाने के लिए किया था तो बिना मांग पूरी हुए उन्होंने अनशन क्यों तोड़ दिया? ऐसा कौनसा आश्वासन उन्हें मिल गया, जिसके कारण उन्होंने न केवल अनशन तोड़ा बल्कि भाजपा को जीत का आशीर्वाद भी दे दिया।
दूसरी तरफ भाजपा के ही नेता एवं पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने जिन्होंने अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को गिरने की नैतिक जिम्मेदारी ली थी, उन्होंने ट्रस्ट में एक ओबीसी सदस्य को शामिल करने की मांग उठा दी। कल्याण सिंह ने कहा कि सरकार को राम मंदिर ट्रस्ट में एक दलित के साथ किसी ओबीसी को भी शामिल करना चाहिए। देश में ओबीसी की संख्या सबसे ज्यादा है, ऐसे में मंदिर ट्रस्ट में कम से कम एक ओबीसी को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वो खुद ट्रस्ट का हिस्सा नहीं बनना चाहते लेकिन एक ओबीसी को जरूर लिया जाए।
इसी तरह से राम मंदिर आंदोलन और विवादित बाबरी ढांचे के विध्वंस मामले की आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी ओबीसी समुदाय के किसी एक व्यक्ति को इस मंदिर ट्रस्ट में करने की मांग उठाते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व ओबीसी समुदाय ने किया था, जिनमें खुद से लेकर कल्याण सिंह और विनय कटियार शामिल थे। ऐसे में एक ओबीसी को ट्रस्ट में जगह मिलनी ही चाहिए। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि संघ प्रमुख,दलित और ओबीसी सदस्य की मांग आखिर भाजपा और संघ से जुड़े सदस्य ही क्यों उठा रहे हैं। वे क्या अपने स्टैंड पर कायम रहेंगे या लोगों का ध्यान भटकाने और ट्रस्ट को लेकर उठ रहे सवालों से लोगों को ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। यह तो समय ही बताएगा ।
Published on:
07 Feb 2020 09:30 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
