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MLA Ravindra Singh Bhati : क्या ‘आत्मदाह’ की कोशिश और ‘खून से खत’ का असर? भजनलाल सरकार ने जारी किए ये आदेश

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के 47 दिन लंबे आंदोलन और खून की चिट्ठी के बीच भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला। शिव विधानसभा क्षेत्र के लिए 4 नए ट्यूबवेल मंजूर। पढ़ें बड़ी सियासी ग्राउंड रिपोर्ट।

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MLA Ravindra Singh Bhati and CM Bhajan Lal Sharma - File PIC

MLA Ravindra Singh Bhati and CM Bhajan Lal Sharma - File PIC

सरहदी सियासत और रेगिस्तान की तपती रेत के बीच अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और सूबे की भजनलाल शर्मा सरकार के बीच चल रही शह-मात के खेल में आज एक बेहद नया और चौंकाने वाला टर्निंग पॉइंट सामने आया है। बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में मजदूरों और ट्रक ऑपरेटरों की जायज मांगों को लेकर पिछले डेढ़ महीने से अधिक समय से धरना स्थल पर डटे निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के कड़े तेवरों के आगे आखिरकार प्रशासनिक मशीनरी को हरकत में आना ही पड़ा।

एक तरफ जहां गिरल माइंस के मजदूरों के शोषण के खिलाफ चल रहे इस ऐतिहासिक आंदोलन का आज 47वां दिन है, वहीं दूसरी तरफ जयपुर के जल भवन (PHED मुख्यालय) से एक ऐसा सरकारी आदेश जारी हुआ है जिसने इस पूरे आंदोलन की दिशा और दशा को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। सरकार ने शिव विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पानी की भारी किल्लत को दूर करने के लिए करीब ₹78.48 लाख की लागत से बनने वाले 4 नए ट्यूबवेल को हरी झंडी दे दी है।

खून की चिट्ठी से लेकर आत्मदाह की कोशिश तक

शिव विधानसभा क्षेत्र के गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में चल रहा यह धरना प्रदर्शन जारी है। स्थानीय श्रमिकों और ट्रक ऑपरेटरों की समस्याओं को लेकर खुद विधायक रविंद्र सिंह भाटी धरना स्थल पर हैं और धूप-छांव की परवाह किए बिना डटे हुए हैं।

पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास: आंदोलन के शुरुआती हफ्तों में जब प्रशासन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो बेहद गुस्से और हताशा में आकर युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह करने तक का खौफनाक प्रयास कर डाला था, जिससे पूरे सूबे की कानून व्यवस्था हिल गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खून से पत्र: आंदोलन के 46वें दिन रविवार को जब देश के गृह मंत्री अमित शाह बीकानेर और राजस्थान के दौरे पर आ रहे थे, तब विधायक भाटी और प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने अपने खून से पत्र लिखा। इस पत्र में गिरल माइंस क्षेत्र के मजदूरों को मिल रहे 12 घंटे के अमानवीय कामकाजी शिफ्ट (Working Hours) और दमनकारी नीतियों के खिलाफ सीधे देश के गृह मंत्री से न्याय की गुहार लगाई गई थी।

PHED मुख्यालय आदेश

जैसे ही रविवार को खून से लिखी चिट्ठी का मामला दिल्ली और जयपुर के गलियारों में गूंजा, वैसे ही सोमवार सुबह जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED), मुख्य अभियंता (ग्रामीण) कार्यालय, 2-सिविल लाइंस जयपुर से एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया गया। यह पत्र अतिरिक्त मुख्य अभियंता, PHED रीजन जोधपुर द्वितीय को संबोधित करते हुए भेजा गया है।

मजदूरों के शोषण के खिलाफ आर-पार की जंग

बाड़मेर के गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में चल रहा यह विवाद बहुत पुराना और गहरा है। स्थानीय श्रमिकों का आरोप है कि माइंस प्रबंधन और ठेका कंपनियां श्रम कानूनों (Labour Laws) की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं।

श्रमिकों ने अपनी जिन मुख्य मांगों को लेकर विधायक भाटी के नेतृत्व में धरना दिया हुआ है, वे हैं:

कार्य के घंटों का शोषण: देश के श्रम कानून के मुताबिक किसी भी खदान या माइंस में 8 घंटे से अधिक की शिफ्ट नहीं हो सकती, लेकिन गिरल माइंस के श्रमिकों से जबरन 12-12 घंटे तक कड़ा और जानलेवा कार्य कराया जा रहा है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त ओवरटाइम भुगतान के।

कठिन परिस्थितियां और बुनियादी सुविधाओं का अभाव: खदान क्षेत्र में काम करने वाले इन मजदूरों को न तो शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है और ना ही सुरक्षा के आधुनिक उपकरण।

    सरकार की 'सौगात' के राजनीतिक मायने

    राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आंदोलन के ४७वें दिन शिव क्षेत्र के लिए अचानक ₹78.48 लाख का बजट जारी होना महज एक प्रशासनिक संयोग नहीं हो सकता। इसके पीछे गहरी राजनीतिक बिसात और रणनीतिक चालें साफ दिखाई दे रही हैं।

    रविंद्र भाटी का बढ़ता कद: विंद्र सिंह भाटी मारवाड़ और पूरे राजस्थान के युवाओं के बीच एक बेहद लोकप्रिय और फायरब्रांड नेता के रूप में उभरे हैं। गिरल माइंस में उनके धरने ने राज्य सरकार की साख और कानून व्यवस्था पर लगातार सवालिया निशान खड़े किए हैं।

    डैमेज कंट्रोल का प्रयास: अमित शाह को खून से पत्र लिखे जाने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ सकता था। ऐसे में सरकार ने शिव विधायक द्वारा पूर्व में भेजे गए मांग पत्रों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 ट्यूबवेल स्वीकृत कर दिए। इसके जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह शिव क्षेत्र के विकास और वहां के लोगों की मूलभूत सुविधाओं (पीने के पानी) के लिए पूरी तरह गंभीर है, ताकि आंदोलन की धार को थोड़ा कम किया जा सके।