
कोटपूतली मण्डी में रखी सरसों की बोरी। फोटो पत्रिका
कोटपूतली (जयपुर)। जिले की कृषि मंडियों में सरसों के दामों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। विदेशी खाद्य तेलों के आयात में कमी और अंतरराष्ट्रीय हालातों के असर से बीते 15 दिनों में सरसों के भाव करीब 1000 रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ गए है। इसका असर रसोईघर के बजट पर भी पड़ रहा है। सरसों के दाम बढने के साथ सरसों तेल के दाम भी 10 से 15 किलोग्राम बढ गए है।
कृषि उपज मंडियों में इन दिनों सरसों की आवक के साथ कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। मण्डी में इन दिनों सरसों की 400 से 500 कटटों की आवक हो रही है। चने की पैदावार नहीं के बराबर होने से यहां मण्डी में चने की आवक नहीं है। मंडी व्यापारियों के अनुसार विदेशी खाद्य तेलों, विशेषकर पाम और सोयाबीन तेल के आयात में कमी आने से घरेलू बाजार में सरसों तेल की मांग बढ़ी है, जिससे सरसों के भाव लगातार ऊपर जा रहे है।
गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष कैलाशचंद पंसारी ने बताया कि करीब 15 दिनों में सरसों के भाव में लगभग 1000 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई है। वर्तमान में यहां मण्डी में सरसों 7600 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रही है। सरसों की आवक शुरू होने पर शुरूआती दौर में सरसों के भाव 6200 रुपए प्रति क्विंटल थे। सरसों तेल के व्यापारी रघुबीर गोयल ने बताया कि सरसों के दाम बढने से तेल में 15 रुपए प्रति किलोग्राम की बढोतरी हुई है। सरसों तेल जो पहले 160 रुपए प्रति किलोग्राम था वह अब बढकर 175 से 180 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया।
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण खाद्य तेलों का आयात प्रभावित हुआ है। इसका असर स्थानीय बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि कई किसानों को इस तेजी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। क्योंकि अधिकांश किसान पहले ही अपनी उपज बेच चुके है। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में मांग बनी रहने पर खाद्य तेलों और दलहन के बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं की रसोई का बजट प्रभावित होने की संभावना है, जबकि जिन किसानों के पास अभी भी स्टॉक बचा है वे बेहतर कीमत मिलने से बाजार में सरसों बेच रहे है।
सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रूपए प्रति क्विंटल है। जबकि बाजार में सरसों के भाव शुरूवात से ही अधिक रहे है। जिससे समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद नहीं हुई। बाजार में भाव अधिक मिलने पर किसानों ने समर्थन मूल्य पर उपज नहीं बेचान की। जबकि गेंहू का समर्थन मूल्य बाजार से भाव अधिक होने से सरकारी खरीद केन्द्र पर गेंहू की लगातार आवक हो रही है।
Published on:
25 May 2026 03:57 pm
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