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सावधान! गर्भावस्था में बीपी, शुगर से कर रही किडनी खराब

यदि आपका बच्चा 5 वर्ष की आयु के बाद भी बिस्तर गीला कर रहा है या बार-बार पेशाब की समस्या से परेशान है तो इसे सिर्फ आदत समझकर टालें नहीं। समय पर ध्यान नहीं देने पर 50 प्रतिशत बच्चों के लिए भविष्य में यह गुर्दे की बीमारी या संक्रमण का कारण भी हो सकता है। गुर्दा रोग विशेषज्ञ व सवाई मानसिंह अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ.एल.सी.शर्मा के अनुसार बार-बार पेशाब आना, पेशाब में जलन होना या बच्चे का पेशाब के समय रोना, एक बार पेशाब करने के बाद दुबारा जाना जैसे लक्षण 50 प्रतिशत बच्चों में गुर्दे की बीमारी या संक्रमण के कारण हो सकते हैं।

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Kidney Health

यदि आपका बच्चा 5 वर्ष की आयु के बाद भी बिस्तर गीला कर रहा है या बार-बार पेशाब की समस्या से परेशान है तो इसे सिर्फ आदत समझकर टालें नहीं। समय पर ध्यान नहीं देने पर 50 प्रतिशत बच्चों के लिए भविष्य में यह गुर्दे की बीमारी या संक्रमण का कारण भी हो सकता है। गुर्दा रोग विशेषज्ञ व सवाई मानसिंह अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ.एल.सी.शर्मा के अनुसार बार-बार पेशाब आना, पेशाब में जलन होना या बच्चे का पेशाब के समय रोना, एक बार पेशाब करने के बाद दुबारा जाना जैसे लक्षण 50 प्रतिशत बच्चों में गुर्दे की बीमारी या संक्रमण के कारण हो सकते हैं। सामान्य लक्षणों से भी बीमारी की गंभीरता को स्वयं के स्तर पर समझा जा सकता है। मौसम में बदलाव और कोविड महामारी से भी गुर्दे की बीमारी बढ़ रही है।

इन लक्षणों से रहें सावधान

गर्भावस्था के दौरान तेज सिर दर्द, आंखों में परेशानी, पसलियों के ठीक नीचे दर्द होना, चेहरे, हाथ-पैर पर अचानक सूजन आना, रक्त की जांच में क्रिएटिनिन बढ़ा आए तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

ये भी कारण
सवाई मानसिंह अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.विनय मल्होत्रा के अनुसार प्रसव के दौरान रक्तस्राव, गर्भपात, अधिक आयु में गर्भधारण करना,10 वर्ष से अधिक गर्भावस्था का अंतराल, मोटापा, आनुवंशिकी, प्रसव के दौरान हाइजीन का इस्तेमाल न होना व घर में प्रसव कराने आदि कारणों से किडनी पर प्रभाव पड सकता है।

लापरवाही बरतना महिलाओं के लिए नुकसानदायक
गर्भावस्था में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतना महिलाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इस दौरान अनियंत्रित बीपी और शुगर से उन्हें किडनी संबंधी बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। राजधानी के निजी व सरकारी अस्पतालों में ऐसे केस लगातार देखे जा रहे हैं। हालांकि शुगर की शिकायत कुछ ही महिलाओं में होती है, लेकिन इस समय उनमें उच्च रक्तचाप होना आम बात है। जिससे किडनी संबंधी दिक्कतें होती हैं। हर माह 5 से 10 गर्भवती एक्यूट किडनी इंजरी से ग्रस्त होकर सवाई मानसिंह अस्पताल में पहुंच रही हैं। उन्हें डायलिसिस की भी जरूरत पड़ती है। इनमें अधिकांश ठीक हो जाती हैं, लेकिन 2-3 महिलाएं क्रोनिक किडनी डिजीज का शिकार हो जाती हैं। जिससे उन्हें ताउम्र किडनी की समस्या से जूझना पड़ता है।

20 फीसदी महिलाओं में दिक्कत

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर की दिक्कत 20 फीसदी महिलाओं में देखी जाती है। इससे मां और शिशु दोनों को खतरा रहता है। -डॉ. शालिनी राठौड़, वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल, सांगानेरी गेट


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