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ये एेतिहासिक छतरियां कभी थीं आकर्षण का केंद्र, आज बहा रही बदहाली के आंसू

देशभर में जहां स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है, वहीं सूर्यनगरी में विश्व प्रसिद्ध कागा की छतरियां अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं।

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कोटा

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Nidhi Mishra

Feb 23, 2016

देशभर में जहां स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है, वहीं सूर्यनगरी में विश्व प्रसिद्ध कागा की छतरियां अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। कभी आकर्षण का केन्द्र बनने वाली करीब 250 साल पुरानी आकर्षक नक्काशी वाली कलात्मक छतरियां अब गन्दगी से घिरी हुई हैं। किसी को इनकी परवाह नहीं है। एेसे में आजकल विदेशी पावणे भी इन छतरियों की तरफ कम ही जाते हैं।

कागा कागड़़ी मेला और श्मशानघाट के रास्ते में कलात्मक पत्थरों से निर्मित 70 से अधिक छतरियां बदहाल हो चुकी हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इनकी बनावट मन मोह लेती थी, परंतु देखभाल के अभाव में इन छतरियों का अस्तित्व मिटने के कगार पर है।

इतिहास की साक्षी इन छतरियों पर बारीकी से कलात्मक चित्रकारी देखते ही बनती है पर यह चित्रकारी भी अब धुंधला रही है। पुरातत्व विभाग के जिम्मेदार भी इसे भुला बैठे हैं। कई साल तक इनकी देखभाल की गई, पर अब वक्त बदलने के साथ हालात खराब हो रहे हैं।

उठता रहता है धुआं
श्मशान घाट जाने वाले रास्ता पूरी तरह डंम्पिग स्टेशन बना हुआ है। छतरियों के आसपास पड़े रहने वाले कचरे को जला दिया जाता है। इससे निकलने वाले धुएं से छतरियां व चबूतरे भी अपनी आभा खोने लगे हैं। कई छतरियां काली पड़ गई है।

आग की आंच से कई छतरियों के खम्भे व छज्जे टूट चुके हैं। लगातार जर्जर हो रही कलात्मक छतरियां बंगलियां आने वाले समय में ध्वस्त हो जाएंगी और जिम्मेदार प्रशासनिक व जनप्रतिनिधि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

कौन सुधारेगा हालात
कई छतरियों के छज्जे, खम्भे सहित अन्य जगहों पर लगे पत्थर गिर चुके हैं। छतरियों के बीचोबीच लगी जाली भी पूरी ध्वस्त होने के कगार पर है। कागा-कागड़ी श्मशान घाट जाने वाले रास्ते में चारों तरफ गंदगी फैली है। छतरी में शराब की खाली बोतलें व अन्य सामान बिखरे पड़े हैं। रियासतकालीन छतरी में तोड़-फोड़ भी रही है। जालियां भी लोगों ने तोड़ दी है।

इसलिए खास हैं छतरियां
ये छतरियां तो श्मशान स्थल पर बनी हुई हैं। इससे वहां छतरियों के रूप में सौंदर्य बिखरा हुआ है। इन छतरियों में फिल्मों की शूटिंग भी होती है। कई फिल्मों में ये छतरियां दिखाई गई हैं। पुरानी फिल्मों के साथ ही आधुनिक फिल्मों के डायरेक्टरों को भी यहां की लोकेशन लुभाती है।

यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो यह विरासत यूं ही खत्म हो जाएगी। देश-विदेश से आने वाले सैलानी इनकी फोटो अपने कैमरे में कैद करते हैं। कोई भी सैलानी इसके आकर्षण से बच नहीं पाता और दीदार करने कागा-कागड़ी पहुंच जाता है। छततिरयों के प्रति प्रशासन की उदासीनता पर्यटन पर भी भारी पड़ सकती है।

बदल सकती है कागा क्षेत्र की सूरत
- कलात्मक छतरियों की मरम्मत हो, जिसकी कार्ययोजना अभी से तैयार की जाए।
- छतरियों के बीच रंगीन रोशनी कर सैलानियों को यहां रात्रि में आने के लिए आकर्षित किया जाए।
- गंदगी ना फैले इसके लिए जगह-जगह कचरा पात्र होने के साथ ही दिन में दो बार सफाई करवाई जाए।
- कागा मेला छतरियों व श्मशानघाट के सौंदर्यीकरण के लिए राज्य सरकार से विशेष योजना तैयार करवाई जाए।

आकर्षक नक्काशी
रियासतकालीन छतरियों में आकर्षक नक्काशी, पर्यटकों को बरबस आकर्षित करती है। सफाई व रखरखाव नहीं होने के कारण यह धरोहर अपना अस्तित्व खो रही है। प्रशासन और पुरातत्व विभाग को इन ऐतिहासिक छतरियों पर गौर करना चाहिए।
-माधोसिंह कच्छवाह, पूर्व विधायक एवं शीतला माता कागा तीर्थ टे्रस्ट के अध्यक्ष

विकसित करेंगे
छतरियां हमारी विरासत है। इन्हें खराब नहीं होने देंगे। जल्दी ही यहां से कचरा व गन्दगी हटाने की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही इस जगह को विकसित किया जाएगा।
-घनश्याम ओझा, महापौर, नगर निगम

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