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विद्याधर नगर डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट बी.वी.दोशी ने जीता आर्किटेक्चर का नोबेल ‘प्रित्जकर’ प्राइज

जाने-माने आर्किटेक्ट बी.वी.दोशी ने फॉच्र्यून 50 ग्रेटेस्ट लीडर लिस्ट 2018 में जगह बनाई है, जयपुर के विद्याधरनगर को किया डिजाइन
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जयपुर

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Priyanka Yadav

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Updated: 27 Apr 2018, 12:54 PM IST

B.V. Doshi, designer of Vidyadhar town

जयपुर . हाल ही आर्किटेक्चर का नोबेल ‘प्रित्जकर’ प्राइज जीतने वाले पहले भारतीय आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोशी ने मुकेश अंबानी और लॉयर इंदिरा जयसिंह के साथ फॉच्र्यून 50 ग्रेटेस्ट लीडर लिस्ट 2018 में जगह बनाई है। उन्होंने इस सूची में एप्पल चीफ एग्जीक्यूटिव टिम कुक, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जैकिंडा और फ्रांसिसी राष्ट्रपति इमानुअल मैक्रॉन के साथ स्थान पाया है। दोशी को ४३ वें स्थान पर रखा गया है। उन्हें देश की कई बेहतरीन इमारतों के साथ जयपुर के विद्याधर नगर को डिजाइन करने का श्रेय जाता है। उन्हें ‘गरीबों का वास्तुकार’ कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा दादाजी से मिली है उन्होंने बताया की ‘मेरे दादाजी फर्नीचर का काम करते थे, उनकी वर्कशॉप में एक कारीगर काम करता था। वह ड्रिंक करता था। एक दिन उसकी बीवी हमारे यहां आकर रोने लगी। उसने फटे लिबास पहन रखे थे, वह कह रही थी कि उसके पति ने सारे पैसे ले लिए हैं, मैंने सोचा कि उसके घर जाकर असलीयत पता करनी चाहिए और जैसे ही मैं वहां पहुंचा तो हैरान रह गया उसका घर बिलकुल खाली था, उसमें न कोई उम्मीद थी और न ही कोई आस। तब मुझे लगा कि एेसे लोग न जाने कितने होंगे। उस दिन मैंने सोचा कि इन लोगों के लिए मुझे काम करना है।

जब मैंने स्कूल शुरू किया तो लो कॉस्ट हाउसिंग पर काम किया। इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन के लिए मुझे इंदौर में काम करने का मौका मिला। मुझे लगता है कि कई बार एक आर्किटेक्ट रास्ते में बैठे लोगों को देखता ही नहीं है, जबकि कई डिजाइन की इंस्पिरेशन उसे इन्हीं से मिल सकती है।’ दोशी ने कहा कि मैं सफलता को उन फाइनेंशियल वीक लोगों को समर्पित करना चाहता हूं। जिन्हें मेरी वास्तुकला ने एक ‘उम्मीद’ दी। जिनके पास जगह नहीं, सिर्फ उम्मीद रही, उनके लिए वह उम्मीद यदि सफल होती है तो मुझे भी खुशी होती है।

आर्किटेक्चर की फीस से नाखुश

दोशी ने कहा कि आर्किटेक्चर की पढ़ाई में रेगुलेशन बहुत हैं। फीस भी बहुत ज्यादा है। इसलिए लोग प्रोफेशनल तौर पर सिर्फ क्लाइंट्स के लिए काम करते हैं। जबकि हर युवा को सोचना चाहिए कि पढ़ाई के बाद समाज के लिए क्या करेगा। उसके बाद जो काम होगा, उसमें आनंद होगा और इससे उसमें क्लाइंट को समझाने का भी कॉन्फिडेंस आ जाएगा। शिक्षक को भी एक्जेम्प्लरी एजुकेशन या आउटकम बेस्ड एजुकेशन पर फोकस करना चाहिए। जिससे उम्मीद का कोई रास्ता निकलता हो।

जयसिंह से प्रभावित

मैं अभी तक जिंदगी में जहां भी गया हूं, वहां के पुराने मकान और वास्तुकला को ऑब्जर्व करता हूं। जब फतेहपुर सीकरी गया तो वहां लगा कि यहां स्टेंडर्ड मैटेरियल, कॉलम और डिजाइन को लेकर काफी काम देखा। वो प्लानेट और लोगों के रहने के लिए भी अच्छा है। मेरा मानना है कि जयपुर जैसा डिजाइन्ड शहर तो कहीं नहीं है। जय सिंह में काफी खूबियां थीं और वे ब्रह्मांड को जयपुर में लेकर आना चाहते थे। मैंने अपने ज्यादातर डिजाइन इसी तर्ज पर किए हैं। स्मार्ट सिटी को लेकर उन्होंने कहा कि जो स्मार्ट आदमी हो सकता है, वह स्मार्ट सिटी भी बना सकता है। इसके लिए विचारधारा में फर्क होना चाहिए।

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