
जयपुर . आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोशी ने हाल ही में आर्किटेक्चर का नोबेल ‘प्रित्जकर’ प्राइज जीता। पहली बार किसी भारतीय आर्किटेक्ट को इस अवार्ड से नवाज़ा गया। बालकृष्ण दोशी ने मुकेश अंबानी और लॉयर इंदिरा जयसिंह के साथ फॉच्र्यून 50 ग्रेटेस्ट लीडर लिस्ट 2018 में जगह बनाई है। इतना ही नहीं इस सूची में कई नामचीन हस्तियां जैसे एप्पल चीफ एग्जीक्यूटिव टिम कुक, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जैकिंडा और फ्रांसिसी राष्ट्रपति इमानुअल मैक्रॉन भी शमिल है। दोशी को इस सूची में 43 वां स्थान प्राप्त हुआ। उन्हें देश के लिए कई बेहतरीन इमारते बनाई है। इतना ही नहीं जयपुर के विद्याधर नगर को भी इन्होने ही डिजाइन किया है। इन्हे ‘गरीबों का वास्तुकार’ भी कहा जाता है।
जब उनसे उनकी प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा दादाजी से मिली उन्होंने बताया की ‘मेरे दादाजी फर्नीचर का काम करते थे, उनकी वर्कशॉप में एक कारीगर काम करता था। जिसको ड्रिंक करने की लत थी। एक दिन उसकी बीवी हमारे यहां आकर रोने लगी। उसने फटे लिबास पहन रखे थे, वह कह रही थी कि उसके पति ने सारे पैसे ले लिए हैं, फिर मैंने सोचा कि उसके घर जाकर असलीयत पता करनी चाहिए और जैसे ही मैं वहां पहुंचा तो हैरान रह गया उसका घर बिलकुल खाली था, उसमें न कोई उम्मीद थी और न ही कोई आस। तब मुझे लगा कि एेसे लोग न जाने कितने होंगे। उस दिन मैंने सोचा कि इन लोगों के लिए मुझे काम करना है।
आगे बताते हुए उन्होंने कहा की जब मैंने स्कूल शुरू किया तो लो कॉस्ट हाउसिंग पर काम किया। इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन के लिए मुझे इंदौर में काम करने का मौका मिला। उन्होने कहा की मुझे लगता है कि कई बार एक आर्किटेक्ट रास्ते में बैठे लोगों को देखता ही नहीं है, जबकि कई डिजाइन की इंस्पिरेशन उसे इन्हीं से मिल सकती है।’ दोशी ने कहा कि वे अपनी सफलता का श्रेय फाइनेंशियल वीक लोगों को समर्पित करना चाहते है। जिन्हें मेरी वास्तुकला ने एक ‘उम्मीद’ दी है। जिनके पास जगह नहीं, सिर्फ उम्मीद रही, उनके लिए वह उम्मीद यदि सफल होती है तो मुझे भी खुशी होती है।
आर्किटेक्चर की फीस से नाखुश
दोशी ने आर्किटेक्चर की पढ़ाई के बारे में बाते हुए कहा की आर्किटेक्चर की पढ़ाई में रेगुलेशन बहुत ज़रूरी हैं, साथ ही इसकी फीस भी बहुत ज्यादा है। इसलिए लोग प्रोफेशनल तौर पर सिर्फ क्लाइंट्स के लिए काम करते हैं। जबकि हर युवा को पढाई के साथ समाज के लिए कुछ करने के बारे में भी सोचना चाहिए। उसके बाद जो काम होगा, उसमें आनंद होगा और इससे उसमें क्लाइंट को समझाने का भी कॉन्फिडेंस आ जाएगा। शिक्षक को भी एक्जेम्प्लरी एजुकेशन या आउटकम बेस्ड एजुकेशन पर फोकस करना चाहिए। जिससे उम्मीद का कोई रास्ता निकलता हो।
जयसिंह से प्रभावित
मैं अभी तक जिंदगी में जहां भी गया हूं, वहां के पुराने मकान और वास्तुकला को ऑब्जर्व करता हूं। जब फतेहपुर सीकरी गया तो वहां लगा कि यहां स्टेंडर्ड मैटेरियल, कॉलम और डिजाइन को लेकर काफी काम देखा। वो प्लानेट और लोगों के रहने के लिए भी अच्छा है। उन्होंने जयपुर के बारे में बताते हुए कहा की मेरा मानना है कि जयपुर जैसा डिजाइन्ड शहर तो कहीं नहीं है। जय सिंह में काफी खूबियां थीं और वे ब्रह्मांड को जयपुर में लेकर आना चाहते थे। मैंने अपने ज्यादातर डिजाइन इसी तर्ज पर किए हैं। स्मार्ट सिटी को लेकर उन्होंने कहा कि जो स्मार्ट आदमी हो सकता है, वह स्मार्ट सिटी भी बना सकता है।
Published on:
27 Apr 2018 01:53 pm
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