
जयपुर एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा, पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर. त्योहार या पीक सीजन ही नहीं, अब सामान्य लॉन्ग वीकेंड में भी हवाई सफर आम यात्रियों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। स्थिति यह है कि एयरलाइन कंपनियां बिना किसी खास अवसर के ही यात्रियों से डेढ़ से तीन गुना तक अधिक किराया वसूल रही हैं। शनिवार से सोमवार तक तीन दिन के लॉन्ग वीकेंड को देखते हुए प्रमुख रूटों पर हवाई टिकट के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं।
दरअसल, इन दिनों 26 जनवरी के आसपास की बुकिंग पर जयपुर से गोवा का हवाई किराया 10,820 रुपए तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में यही टिकट 7 हजार रुपए के आसपास मिल जाता है।
इसी तरह जयपुर से हैदराबाद और कोलकाता का किराया 15 से 16 हजार रुपए तक पहुंच गया है। दिल्ली के लिए भी टिकट के दाम 7 हजार रुपए पार कर चुके हैं। मुंबई, चंडीगढ़, पुणे जैसे रूटों पर भी यही हाल देखने को मिल रहा है। ट्रेवल एजेंट्स का कहना है कि अब एयरलाइंस केवल त्योहारों या लंबी छुट्टियों तक सीमित नहीं रह गई हैं।
सामान्य लॉन्ग वीकेंड पर भी ‘फेस्टिव रेट’ लागू करना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। जैसे ही मांग बढ़ती है, डायनेमिक प्राइसिंग के जरिए किराया बढ़ा दिया जाता है। इसका सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ रहा है, जो ऐनवक्त पर यात्रा की योजना बनाते हैं। उन्हें मजबूरी में महंगे टिकट खरीदने पड़ रहे हैं।उनका ट्रेवल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि लगातार बढ़ते हवाई किराए का असर पर्यटन और घरेलू यात्राओं पर भी पड़ने लगा है। कई लोग अब लॉन्ग वीकेंड पर यात्रा टालने या प्लान कैंसिल करने को मजबूर हो रहे हैं।
इधर रेलवे भी यात्रियों को कोई खास राहत नहीं दे पा रहा है। लंबी दूरी की ज्यादातर ट्रेनें पहले से ही फुल चल रही हैं। लॉन्ग वीकेंड के दौरान कंफर्म टिकट मिलना बड़ी चुनौती बन गया है। यहां तक कि यात्रा वाले दिन टिकट बुक करना भी आसान नहीं है। कई रूटों पर ‘नो-रूम’ जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे में यात्रियों के पास महंगे हवाई टिकट लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।
(24-26 जनवरी की बुकिंग बनाम सामान्य किराया)
कोलकाता: 11,309-16,664 रु. | सामान्य 6,972 रु.
हैदराबाद: 10,300-16,224 रु. | सामान्य 6,159 रु.
गोवा: 10,821 रु. | सामान्य 7,096 रु.
दिल्ली: 7,274-8,880 रु. | सामान्य 2,569-2,805 रु.
चंडीगढ़: 8,919 रु. | सामान्य 4,877 रु.
पुणे: 11,375–13,337 रु. | सामान्य 7,767 रु.
(एयरलाइन प्रतिनिधियों के अनुसार किराए में कोई अतिरिक्त शुल्क शामिल नहीं है)
पर्यटन एवं ट्रैवल सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइन कंपनियां फेस्टिव और पीक सीजन के अलावा अब हर लॉन्ग वीकेंड, छुट्टी या किसी बड़े आयोजन को मुनाफाखोरी के अवसर में बदल रही हैं। हवाई किराए बढ़ाने के लिए न तो कोई पारदर्शी नीति है और न ही प्रभावी निगरानी। डीजीसीए केवल दर्शक की भूमिका में नजर आता है, जबकि कोर्ट कई बार अनावश्यक किराया वृद्धि पर सख्त टिप्पणी कर चुका है। इसके बावजूद एयरलाइन कंपनियां मनमाने तरीके से किराए बढ़ा रही हैं। सवाल यह है कि जब स्पष्ट रूप से एक ही समय, एक ही रूट पर किराया डेढ़ से तीन गुना तक बढ़ाया जा रहा है, तो क्या यह एकाधिकार और जमाखोरी की श्रेणी में नहीं आता?। एयरलाइंस पर एमआरटीपी जैसे कड़े कानून लागू होने चाहिए। ताकि यात्रियों को इसी तरह लूट से बचाया जा सके।
Updated on:
24 Jan 2026 06:54 pm
Published on:
24 Jan 2026 06:54 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
