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कोटा का बबलू राष्ट्रीय स्तर पर चला रहा था फर्जी भर्ती गिरोह, सीबीआई जांच में चौंकाने वाले खुलासे

रक्षा मंत्रालय ने तीन माह पहले दी थी सूचना। सीबीआई ने पीई की जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज की एफआईआर। फर्जी रिजल्ट और नियुक्ति पत्र के साथ ट्रेनिंग सेंटर भी फर्जी। नौकरी के नाम पर वसूले पांच से दस लाख रुपए। सेना के बर्खास्त सिपाही और उसकी पत्नी सहित दस आरोपियों के खिलाफ केस। पति-पत्नी के खातों में कुछ माह में आए डेढ़ करोड़, अन्य आरोपियों के खातों की पड़ताल होना बाकी।

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जयपुर. कोटा का बबलू चौहान भर्ती के नाम पर राष्ट्रीय स्तर पर ठगी का गिरोह चला रहा था। सेना से बर्खास्त होने के बाद बबलू चौहान ने गिरोह चला कर भर्ती के नाम पर एक-एक युवक से पांच से दस लाख रुपए वसूले। उसने फर्जी रिजल्ट और नियुक्ति पत्र देने के बाद फर्जी ट्रेनिंग सेंटर भी चलाए। सीबीआई ने तीन माह लम्बी जांच के बाद गिरोह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिसमें कोटा के सोगरिया निवासी बबलू चौधरी और उसकी पत्नी सहित दस आरोपी हैं। गिरोह ने सेना, भारतीय खाद्य निगम और रेलवे में नौकरी दिलाने का वादा कर कई बेरोजगारों के साथ ठगी की है। वर्ष 2020-22 के दौरान बबलू और उसकी पत्नी के खाते में 1.43 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा हुई। जिसमें अधिकतर उधमपुर, जम्मू, कोटा, हिंडोन और जयपुर के युवकों से लिया था।

ठगी की भनक सबसे पहले रक्षा मंत्रालय को लगी। रक्षा मंत्रालय के उप सचिव ने इसकी शिकायत 5 अप्रेल 2024 को सीबीआई में की गई। सीबीआई ने इस पर प्राथमिक जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि मास्टरमाइंड सिपाही बबलू चौहान ने सेना, प्रादेशिक सेना, असम राइफल्स, भारतीय खाद्य निगम, पूर्वी रेलवे में भर्ती के नाम पर ठगी की थी। उसके साथ कई और कार्मिक भी लिप्त थे। वर्ष 2019 में चौहान गोरखपुर में वीरेंद्र कुमार, नायक दीपक थापा, राजू यादव जैसे लोगों के संपर्क में आया। इन लोगों के प्रादेशिक सेना में संबंध थे, जो बेरोजगारों को 5.50 लाख रुपए में नौकरी दिलवाने का दावा करते थे।

खुद ने बनाए नियुक्ति पत्र, खोल दिए फर्जी ट्रेनिंग सेंटर

बबलू चौहान ने कई युवकों को रेलवे में ग्रुप डी व सी की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उनसे रुपए लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए। इसके बाद फर्जी ट्रेनिंग सेंटर में भेज दिया। फिर उसने अभ्यर्थियों से कहा कि उन्हें एफसीआई में नियुक्ति दिलवाएगा। कुछ उम्मीदवारों को गोरखपुर ले गया, जहां उसने अपना निवास बना रखा था। वहां युवकों को पता चला कि एफसीआई में नौकरी की उम्मीद में राजस्थान के 8-10 युवक पहले से ही वहां रुके हुए थे।