
धूलंडी के अगले दिन गूंजेगा आओ बादशाह खेलों बादशाह...
जयपुर। प्रदेश में प्रसिद्ध ब्यावर के बादशाह की सवारी धूलंडी के अगले दिन 11 मार्च को निकाली जाएगी। बादशाह की सवारी के दौरान आओ बादशाह खेलों बादशाह... गीत गूंजता रहता है। सडकें गुलाल से अट जाएगी और चहुंओर गुलाल ही गुलाल नजर आएगी। 170 साल से लगातार हो रहे इस आयोजन को लेकर तैयारियों को अन्तिम रूप दिया जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक अकबर बादशाह के समय उनके नवरत्नों में से एक टोडरमल अग्रवाल को ढाई दिन की बादशाहत मिलने के उपलक्ष में ब्यावर में वर्ष 1851 से प्रतिवर्ष धुलंडी के अगले दिन बादशाह मेले का आयोजन किया जाता रहा है। अग्रवाल समाज के तत्वावधान एवं जन सहयोग से आयोजित यह मेला सभी समुदाय के लोगों का एक ऐसा सामूहिक त्योहार है जिसमें अग्रवाल समाज का व्यक्ति बादशाह बनता है तथा बादशाह को सजाने का कार्य माहेश्वरी समाज के लोग करते हैं। मेला शुरू होने से पूर्व भांगयुक्त ठंडाई बनाने का कार्य जैन समाज के निर्देशन में किया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में बाजार में वितरित किया जाता है। जिस प्रकार ढाई दिन के बादशाह के रूप में टोडरमल अग्रवाल ने अकबर का खजाना लुटाया था, उसी प्रकार बादशाह मेले के दौरान ट्रक में सवार बादशाह व उनके वजीर खजाने के रूप में गुलाल लुटाते हैं। बादशाह की सवारी के आगे मस्ती से झूमता हुआ बीरबल नृत्य करता हुआ चलता है।
मान्यता है कि बादशाह की ओर से लुटाई गई इस गुलाल को तिजोरी अथवा गल्ले में रखने से पूरे वर्ष धन की कमी नहीं रहती। इस ऐतिहासिक मेले में शहर सहित आस-पास के 100-150 किलोमीटर दूरी तक के लोग भाग लेने ब्यावर आते हैं। मेला संयोजक भरत मंगल ने बताया कि बादशाह मेले की यह सवारी धुलंडी के अगले दिन 11 मार्च को अपराह्न सवा 3 बजे बाद भैरूजी के खेजड़े के निकट से रवाना होगी। जो फतेहपुरिया चौपड़, अजमेरी गेट होते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचेंगी। जहां बादशाह उपखंड अधिकारी से गुलाल की होली खेल उन्हें शहर की कानून व्यवस्था के संबंध में आवश्यक आदेश देंगे।
Published on:
04 Mar 2020 02:18 pm
