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ब्यावर का बादशाह मेला…165 साल से अकबर लुटा रहे गुलाल, बीरबल करता नृत्य

दुनिया में प्रसिद्ध ब्यावर का बादशाह मेला। होली के बाद होता आयोजन।

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raktim tiwari

Mar 09, 2016

शहर का प्रसिद्ध व ऐतिहासिक बादशाह मेला 25 मार्च को मनाया जाएगा। अग्रवाल समाज ब्यावर की ओर से प्रशासन के सहयोग से आयोजित बादशाह मेले में सभी जाति वर्ग के लोग हजारों की संख्या में शामिल होंगे।

मेला संयोजक राजेन्द्र एन. अग्रवाल ने बताया कि बादशाह मेला 25 मार्च अपराह्न 3.30 बजे से आयोजित होगा। श्री बादशाह मेला समिति के अध्यक्ष मुकेश अरड़का, मंत्री नितेश गोयल, सह संयोजक ललित अग्रवाल, नरेन्द्र बजारी व संजय अग्रवाल मेले की व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

बादशाह मेला एक परिचय

ब्यावर में प्रतिवर्ष धुलंडी के दूसरे दिन बादशाह मेला कौमी एकता का प्रतीक है। यह मेला ब्यावर को पर्यटन मानचित्र पर भी विशेष स्थान रखता है। अकबर बादशाह के नवरत्न में से एक टोडरमल अग्रवाल को ढाई दिन की बादशाहत मिलने की याद ताजा करने के उद्देश्य से धुलण्डी के दूसरे दिन अग्रवाल समाज की ओर से प्रशासन व जनसहयोग से प्रतिवर्ष बादशाह का मेला आयोजित किया जाता है।

सन् 18 51 से प्रारम्भ यह मेला सभी समुदाय के लोगों का एक ऐसा पर्व है, जिसमें बादशाह को सजाने संवारने का कार्य माहेश्वरी समाज के लोग करते हैं। ठंडाई बनाने का कार्य जैन समाज के निर्देशन में होता है। इसका वितरण नगर के प्रमुख बाजारों में प्रसाद के रूप में किया जाता है। टोडरमल के अभिन्न मित्र बीरबल (महेश) मुगल साम्राज्य में अपने मित्र को हिन्दू शासक देखकर खुशी में बादशाह के आगे-आगे नृत्य करते हुए चलते हैं जो ब्राह्मण समाज का व्यक्ति होता है। नृत्य की यह परम्परा आज भी चल रही हैं।

खर्ची लूटने की मचती है होड़

बादशाह मेले के दौरान ट्रक में सवार बादशाह की ओर से लुटाई गुलाल को 'बादशाह खर्चीÓ के नाम से सोने की अशर्फियों की तरह लोग लूटने को तत्पर रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह गुलाल अपनी तिजोरी व दुकान के गल्ले में रखना कारोबार में वृद्धि के लिए लाभकारी है। यह माना जाता है कि इसे रखने से खजाना कभी खाली नहीं होता।


ऐसे बढ़ती है मेले की शोभा

ब्यावर के लगभग 100-150 किमी आस-पास के क्षेत्रों में विशेषकर ग्रामीण अंचलों के लोग समूह में ढोल-चंग की थाप पर होली के मधुर गीतों के साथ नाचते-गाते बादशाह मेले की शोभा बढ़ाते हैं। ब्यावर का मुख्य बाजार हजारों लोगों की उपस्थिति में गुलालमय हो जाता है। सैंकड़ों मण लाल रंग की गुलाल की चादर नगर की सड़कों पर बिछ जाती है। सभी एक-दूसरे पर गुलाल लगाकर खुशी का इजहार करते हैं।

प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय परिसर में उपखण्ड अधिकारी से बादशाह गुलाल खेलते हैं। उपखण्ड अधिकारी बादशाह का सम्मान करते हुए राजकीय कोष से बीरबल को नारियल व मुद्रा के रूप में नजराना पेश करते हैं। यह आदेश ब्यावर के संस्थापक कर्नल डिक्सन के समय से प्रभावी है। इस मेले की महत्ता को देखते हुए राजस्थान पर्यटन विभाग ने पर्यटन मेले के रूप में मान्यता दी है।

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