
पीएम किसान की 21वीं किस्त जारी हो गई है। (PC: AI)
दमोह. केंद्र और राज्य सरकारें हर बार बजट में किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही हैंए लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। बीते वर्ष के बजट के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिली। फसल लागत लगातार बढ़ रही हैए जबकि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। नतीजा यह है कि किसान की आमदनी बढऩे के बजाय कर्ज का बोझ लगातार भारी होता जा रहा है।
.धान का 3100 तक नहीं पहुंचा
२०२३ से सरकार द्वारा धान की एमएसपी ३१०० रुपए करने की बात कही जा रही हैए लेकिन अभी तक नहीं कर सके है। किसानों की लंबे समय से मांग रही है कि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएए ताकि बढ़ती लागत की भरपाई हो सके। लेकिन एमएसपी अपेक्षा से कम रहने के कारण किसानों को या तो घाटे में फसल बेचनी पड़ी या फिर निजी व्यापारियों के भरोसे रहना पड़ा है।
. मूंग और सोयाबीन एमएसपी से बाहर
दलहन और तिलहन फसलों की स्थिति और भी खराब रही। मूंग और सोयाबीन की खरीदी एमएसपी पर बहुत सीमित या नाममात्र रही। कई किसानों को अपनी उपज बाजार में एमएसपी से काफी कम दाम पर बेचनी पड़ी। इससे न केवल मुनाफा खत्म हुआए बल्कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। सोयाबीन इस बार भावांतर योजना से खरीदा गयाए जिसमें गड़बड़ी के कारण व्यापारियों का भुगतान भी अटका है। जबकि ३५०० रुपए क्विंटल से कम बिकने पर इसका लाभ भी किसानों को नहीं मिला है।
. गेहूं सहित अन्य फसलों ने दिया नुकसान
गेहूंए चना और अन्य रबी फसलों में भी किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। खादए बीजए कीटनाशकए डीजल और मजदूरी की लागत बढऩे से खेती महंगी हो चुकी हैए लेकिन फसल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े। मौसम की मार और अस्थिर बाजार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
. किसानों की आवाज
सरकार द्वारा किसानों को मुफ्त में विद्युत ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा तो हुईए लेकिन जमीनी स्तर पर कई किसानों को आज तक ट्रांसफार्मर नहीं मिले। जिन किसानों के खेतों में ट्रांसफार्मर खराब हो गएए वे महीनों से बिजली के इंतजार में हैं। इससे सिंचाई प्रभावित हुई और फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है
मुन्ना अहिरवारए किसान
. बजट में कृषि क्षेत्र के लिए योजनाओं और प्रावधानों की बात जरूर की गईए लेकिन जब तक एमएसपी की गारंटीए समय पर खरीदीए बिजलीए सिंचाई की व्यवस्था और लागत पर नियंत्रण नहीं होगाए तब तक आय दोगुनी सिर्फ कागजों में ही रहेगी। फिलहालए खेतों में मेहनत बढ़ी है और किसान की जेब में पैसा घटता जा रहा है।
जमना पटेलए किसान
Published on:
17 Jan 2026 10:25 am
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