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सामंतवादी दुष्चक्र और उपभोगवादी संस्कृति की झलक, रवींद्र मंच पर हुआ नाटक ‘बगिया बांछाराम’ की का मंचन

ललित कला संगम की ओर से शनिवार को रवींद्र मंच पर स्वर्गीय उषा नायर की स्मृति में नाटक 'बगिया बांछाराम की 'का मंचन किया गया। नाटक के लेखक मनोज मिश्र और निर्देशन राम सहाय पारी का रहा।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Mar 18, 2023


ललित कला संगम की ओर से शनिवार को रवींद्र मंच (Ravindra Manch) पर स्वर्गीय उषा नायर की स्मृति में नाटक ‘बगिया बांछाराम की’ ‘ (‘Bagiya Bancharam ki )का मंचन किया गया। नाटक के लेखक मनोज मिश्र और निर्देशन राम सहाय पारी का रहा। नाटक में दिखाया गया कि बांछाराम ने उम्र भर मेहनत कर अपनी बगियां संयोई है। वह महज आजीविका के लिए पेड़ पौधे नहीं उगाता बल्कि धरती के प्रति श्रद्धा और प्रेम उसकी मेहनत के मूल में छिपा है। इस हरे भरे बाग को कई लोग हड़पना चाहते हैं। गांव का पूर्व जंमीदार छैकोड़ी इसी बाग की आस मन में लिए मर गया और अब भूत बनकर इसी बाग में रहता है। उसका बेटा नौकोड़ी अपने सहयोगी मुख्तार के साथ बगीचे को हथियाने की साजिश रचता है। उसने बांछा को बहला फुसलाकर उससे एक इकरारनामा भी करा लिया, जिसके तहत बांछा का बाग उसकी मृत्यु के बाद नौकोड़ी के अलावा बांछा का एकमात्र वारिस गोपी भी बाग को हथियाना चाहता है। वह इस जमीन को बेचकर बिजनेस करना चाहता है। गांव के चोर उचक्के भी बाग से चोरी का अपना पेट पालते हैं। नाटक में जहां एक ओर बांछा की प्रकृति प्रेम और जीने की इच्छा शक्ति का मंचन हुआ तो दूसरी ओर सामंतवादी दुष्चक्रों और धरती को व्यापार का साधन बनाने की मानसिकता और उपभोगवादी संस्कृति भी परिलक्षित होती है। नाटक में अनीस कुरैशी, राजीव अंकित, सुरेश मोहन, रामसहाय पारीक, धनेश वर्मा,देव सागर, राहुल मोदानी, युवराज सिंह भाटी, यूथिका नागर,दिलीप सिंह, कुशलेख वर्मा और रेखा शर्मा ने अभिनय किया। रूप सज्जा भुवनेश, प्रकाश व्यवस्था कमल किशोर और ध्वनि प्रभाव धनेश वर्मा और दिलीप सिंह का रहा।