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बंजर भू से आस, जब लगेगा बांस

भारत बांस उत्पादन के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। भारत का पूर्वी भाग बांस का सबसे बड़ा उत्पादक है। कृषि की दृष्टि से बंजर भूमि मामले में भी प्रदेश का नाम उन बड़े राज्यों में है, जहां बंजर भूमि अधिक है। बंजर जमीन पर कम खर्च में की जा सकती है बांस की खेती। भारत में बांस से जुड़ी 136 किस्में हैं। बांस के पौधे से 40-50 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है।

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बंजर भू से आस, जब लगेगा बांस

बंजर भू से आस, जब लगेगा बांस

राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 342.24 लाख हेक्टेयर का करीब 31 प्रतिशत यानी 105.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बंजर भूमि की श्रेणी में आता है। केन्द्र और राज्य सरकार के स्तर पर बंजर भूमि विकास के कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। दो दशक पहले समेकित बंजर भूमि विकास कार्यक्रम भी शुरू किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 10 जिलों में व्यर्थ भूमि विकास कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। बंजर भूमि पर इस तरह की खेती भी की जा सकती है, जो कम मेहनत में किसान को मुनाफा दे। बांस की खेती इसी का उदाहरण है। जो किसान बंजर भूमि या जलवायु परिवर्तन से परेशान होकर किसी तरह की खेती करने में असमर्थ हैं, वह बांस की खेती कर अच्छी कमाई कर सकते हैं। कृषि विभाग बंजर भूमि पर बांस की खेती पर ध्यान दें तो हालात बदल सकते हैं।

राष्ट्रीय बांस मिशन
केन्द्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बांस योजना की भी शुरुआत की गई है। योजना के तहत बांस के रोपण को प्रोत्साहन दिया जाएगा और खेती करने वाले किसानों को 120 रुपए प्रति पौधे के रूप में आर्थिक मदद की जाएगी।

हर मौसम अनुकूल
बांस तेजी से बढऩे वाला घास प्रजाति का पौधा है। कम पानी की आवश्यकता के कारण इसे बंजर जमीन पर आसानी से उगा सकते हैं। हर तरह की जलवायु और मिट्टी में उत्पादन होता है। वैसे रेतीली दोमट मिट्टी में यह तेजी से बढ़ता है।

साथ में दूसरी फसल भी
बांस के पौधे की रोपाई के लिए जुलाई माह उपयुक्त है। प्रति हेक्टेयर करीब 2000 पौधे लगाए जा सकते हैं। पौधों में दूरी ढाई मीटर और कतार से कतार में तीन मीटर का फासला होना चाहिए। खाली जगह पर दूसरी फसल भी लगा सकते हैं।