राज्य में सड़क दुर्घटनाएं व उनमें मौतों का आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है। एनसीआरबी के आंकडों के मुताबिक राज्य में वर्ष 2021 में 23 हजार से अधिक लोगों की मौत दुर्घटनाओं में हुई है। इसका बड़ा कारण है कंडम वाहन। सड़कों पर कंडम व पुराने वाहन बगैर फिटनेस के दौड़ रहे हैं।
राज्य में सड़क दुर्घटनाएं व उनमें मौतों का आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है। एनसीआरबी के आंकडों के मुताबिक राज्य में वर्ष 2021 में 23 हजार से अधिक लोगों की मौत दुर्घटनाओं में हुई है। इसका बड़ा कारण है कंडम वाहन। सड़कों पर कंडम व पुराने वाहन बगैर फिटनेस के दौड़ रहे हैं।
राज्य में 1 अप्रेल 2022 से केवल पांच शहरों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर, उदयपुर) में 15 साल से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर रोक है। इनके अतिरिक्त सभी शहरों व गांवों में वाहनों के संचालन के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है।
इतना ही नहीं, जिन शहरों में पाबंदी लगाई गई है, वहां से मालिक वाहनों की एनओसी लेकर दूसरे जिले में पुन: पंजीयन करवा रहे हैं। इन शहरों से करीब 15 हजार वाहनों की एनओसी लेकर राज्य के ही दूसरे जिलों में पुन: पंजीयन करवाया गया है। पुन: पंजीयन के बाद इन शहरों को छोड़कर शेष राज्य में वाहन चलाए जा रहे हैं।
पांच शहरों से पुराने वाहनों के पंजीयन तो रद्द किए जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद वाहन शहर में चल रहे हैं या नहीं, यह देखने वाला कोई नहीं है। वाहनों की नंबर प्लेट आरटीओ कार्यालय के बाहर बनाई जा सकती है। वहीं परिवहन विभाग या यातायात विभाग इस तरह की कोई जांच भी नहीं कर रहा है।
केंद्र ने तय नहीं कर रखी वाहनों की उम्र
केंद्र ने वाहनों के कबाड़ होने की अवधि तय नहीं कर रखी है। परिवहन विभाग के दस्तावेज में ऐसे वाहन पंजीकृत हैं जिनका पंजीयन 40-50 साल पहले किया गया था। वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या का बड़ा कारण भी यही है। प्रदेश में करीब दो करोड़ वाहन पंजीकृत हैं, वहीं जयपुर में 34 लाख से अधिक वाहन दौड़ रहे हैं। केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 59 में मोटर वाहनों का जीवन काल तय करने के लिए केंद्र सरकार को अधिकृत किया गया है। जिसके अनुसार केंद्र सरकार किसी मोटर यान का जीवन काल निर्धारित कर सकेगी। 38 बरस बीत चुके हैं, लेकिन केंद्र ने आज तक किसी भी प्रकार के वाहन की आयु निर्धारित नहीं की है।
जयपुर शहर से इतने वाहनों का पंजीयन किया रद्द
ट्रक 2021
बस, ऑटो रिक्शा, एंबुलेंस 364
कैब व टैक्सी 2771
(आंकड़े 1 अप्रेल 2020 से अब तक के)
(इन वाहनों के मालिकों ने एनओसी लेकर दूसरे जिले में पंजीयन करवा लिया है)
इन सवालों से समझें
1. पंजीयन रद्द करने की क्या प्रक्रिया है?
जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर, उदयपुर में 15 साल पूरे करने वाले व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर रोक है। वाहन मालिक एनओसी लेकर दूसरे जिले में वाहन चला सकता है। अन्य किसी भी जिले में ऐसी कोई रोक नहीं है।
2. रोक क्यों लगाई गई?
एनजीटी के आदेश पर एक अप्रेल 2020 से रोक लगाई। कोरोना के कारण इसे आगे बढ़ाया गया। 1 अप्रेल 2022 से आदेश लागू हुए और रोक लगाई गई।
3. रोक निजी वाहन पर भी है?
जी नहीं, यह रोक केवल व्यावसायिक वाहन (टैक्सी, ऑटो रिक्शा, बस, ट्रक, एम्बुलेंस आदि) पर है।
4. जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर, उदयपुर के अलावा देश में और कहां ऐसी रोक है?
दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में पुराने वाहनों के संचालन पर रोक है।