
राजस्थान हाईकोर्ट
Banswara Court Angry थानों में बढ़ते यौन शोषण के प्रकरणों के बीच चौंकाने वाले एक मामले में पीड़िता बताकर झूठे आरोप लगाने पर एक महिला खुद कानूनी शिकंजे में फंस गई। एडीजे कोर्ट बांसवाड़ा ने सबूतों के आधार पर अपने ही रिश्तेदार को उलझाने की कोशिश पर महिला को दोषी करार दिया। हालांकि सजा को लेकर कोर्ट ने बचाव पक्ष की ओर से पहले अपराध और बच्चे छोटे होने के साथ वर्षों से अन्वीक्षा भुगतने की दुहाई पर नरमी बरती। बावजूद इसके, एडीजे नवीनकुमार चौधरी ने दस-दस हजार रुपए के बंध पत्र और जमानतनामे पर सशर्त परिवीक्षा लाभ देते हुए महिला पर दस हजार रुपए अभियोजन व्यय आरोपित किया।
यह था मामला
कलिंजरा क्षेत्र की 44 वर्षीया महिला ने 24 जुलाई,2014 को बागीदौरा कोर्ट में इस्तगासा पेश कर गांव के प्रभु पुत्र टीटा पर आरोप लगाया कि 23 मई, 2014 को जब उसका पति नोतरे में गया था। रात 11 बजे प्रभु तलवार लेकर आया और धमकाते हुए उसका यौन शोषण किया। शोर सुनकर बेटा और बहू आए और आरोपी को आपत्तिजनक हालत में पकड़ा। फिर लोग जुटने पर उन्हें सौंप दिया।
महिला एक बार पहले भी लगाया था ऐसा आरोप
महिला ने इससे पहले 30 जून की रात प्रभु द्वारा इसी तरह की वारदात करना बताया। हालांकि तब एफआईआर दर्ज नहीं कराने के पीछे लोगों का दबाव होने की जानकारी दी। मामले में कोर्ट के आदेश पर कलिंजरा पुलिस ने भादसं की धारा 376 के तहत केस दर्ज कर पर जांच शुरू की।
पति ने खुद कबूला झूठ, एफआर के बाद लगा उल्टा केस
जांच के दौरान 11 सितंबर, 2014 को महिला के पति ने बागीदौरा सीओ को लिखित में देकर बताया कि प्रभु और उसके परिवार के बीच भूमि विवाद था। इसके चलते रिपोर्ट दी। यौन शोषण की घटना ही नहीं हुई। तब पुलिस अधीक्षक के आदेश पर कोर्ट में एफआर पेश करने के साथ पुलिस ने परिवादिया के खिलाफ भादसं की धारा 211 और 182 आईपीसी के तहत इस्तगासा पेश किया। इस पर कोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया।
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Updated on:
14 Sept 2023 02:52 pm
Published on:
14 Sept 2023 02:50 pm

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