जयपुर

राजस्थान में यहां दर्जनों जख्मों से घायल राणा सांगा ने पराक्रम का दिया था परिचय

राजस्थान में यहां दर्जनों जख्मों से घायल राणा सांगा ने पराक्रम का दिया था परिचय

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Jan 30, 2019

जयपुर। राजस्थान स्टेट हैरिटेज प्रमोशन अथोरिटी की ओर से राणा सांगा स्मारक भरतपुर जिले के पास खानवा गांव में वर्ष 2007 में बनाया गया। पहाड़ी पर स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक की तस्वीर वीर योद्धा राणा सांगा की वीरता का बखान करती है। स्मारक स्थल पर इस युद्ध में भाग लेने वाले योद्धाओं की मूर्तियां भी वीरों की गाथा का गुणगान कर रही हैं। बता दें कि 17 मार्च 1527 को मेवाड़ के राणा सांगा और बाबर के मध्य इसी दिन युद्ध लड़ा गया था। वीर योद्धा मेवाड़ (चित्तौड़) के पूर्व शासक महाराणा सांगा का जिक्र गौरव गाथाओं में अवश्य होता है। शरीर पर अस्सी घाव होने के बावजूद युद्ध मैदान में डटे रहने वाले राणा सांगा चित्तौैडग़ढ़ के इतिहास में महत्वपूर्ण शासक माने जाते है। भारत में मुगलों के प्रवेश को रोकने के लिए वर्ष 1527 में खानवा के युद्ध में गंभीर घायल हो गए थे।

खानवा पहली बार युद्ध के दौरान प्रयोग की गई तकनीकी का भी गवाह रहा है। यहीं से बाबर ने तोपखाने और बंदूकों को प्रयोग किया था। इस युद्ध की भयावहता के निशां यहां पहाडिय़ों पर बने हैं। युद्ध के दौरान बाबर के तोपखाने और बंदूकों ने पहाड़ियों को छलनी कर दिया था। इसके बावजूद राणा सांगा ने बाबर के तोपखाने का डटकर मुकाबला किया।

फतेहुपुर-सीकरी से 10 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित खानवा युद्ध के दौरान महाराणा संग्रामसिंह (राणा सांगा) गंभीर घायल हो गए थे, जो बाबर से लड़ते रहे थे। जब उन्हें युद्ध स्थल से बाहर ले जाया गया तो सेना में निराशा छा गई थी।

यहां जन्में थे वीर योद्धा संग्राम सिंह

संग्राम सिंह का जन्म राजस्थान के मालवा में राणा रायमल के घर हुआ था, जो मेवाड़ के राजपूत शासक थे। राणा सांगा का विवाह रानी कर्णावती के साथ हुआ। साल 1508 में मेवाड के राजा के रूप में राणा सांगा ने अपने पिता राणा रायमल के साम्राज्य के उत्तराधिकारी बने।

20 अप्रेल 1526 को बाबर ने पानीपत की लड़ाई में सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली पर अधिकार कर लिया। इसके बाद राणा सांगा और बाबर के बीच 1527 में खानवा का युद्ध हुआ। हालांकि युद्ध के कारणों को लेकर इतिहासकारों में अनेक मत रहे हैं।

Published on:
30 Jan 2019 07:38 pm
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