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कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कल्ला का बयान, कहा-तिवाड़ी के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले

कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा है कि घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी छोड़ी है, यह उनका अपना विषय है

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ghanshyam tiwari and bd kalla

जयपुर। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा है कि घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी छोड़ी है, यह उनका अपना विषय है, लेकिन कांग्रेस का मानना है कि बीते पांच सालों की भाजपा कि नीतियों से ही भाजपा के सीनियर नेता खुद को असहज महसूस कर रहें है।

कल्ला ने कहा कि दूसरी पार्टी बनाना उनका स्वयं का विचार है, लेकिन इसने एक बात साफ कर दी है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं की पांच साल में कोई जनसुनवाई नहीं हुई, जिसके चलते इतने सीनियर नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।

इससे साफ है कि जनता का रुझान कांग्रेस की ओर है। कल्ला ने दावा किया कि जो ब्राह्मणा मतदाता तिवाड़ी के भाजपा से जाने से नाराज होगा वो अब कांग्रेस का रुख करेगा। हालांकि उनके विधानसभा में ब्राह्मण मतदाता जरूर तिवाड़ी के साथ खड़ा होगा, लेकिन अब जनाधार कांग्रेस के साथ है।

ऐसे में तिवाड़ी के साथ जुड़े लोग भी कांग्रेस को ही फायदा पहुंचाएंगे। कला ने कहा कि तिवाड़ी ने अपनी पार्टी बना ली है अगर वो उस पार्टी को छोड़कर कांग्रेस के साथ आना चाहेंगे तो कांग्रेस उनसे जरूर बात करेगी।

बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर ही दी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से लगातार अनबन के चलते तिवाड़ी ने पार्टी छोडऩे की घोषणा कर दी। उन्होंने इस सम्बन्ध में अपना पत्र अमित शाह को लिख दिया है। उन्होंने कहा है कि वे अगला चुनाव भारत वाहिनी पार्टी के चुनाव चिह्न पर सांगानेर विधानसभा से लड़ेंगे।

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राजस्थान का कदम-कदम पर हुआ अपमान
तिवाड़ी ने अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि केन्द्र और राज्य में एेतिहासिक बहुमत देने के बाद भी राजस्थान ठगा सा महसूस कर रहा है। राजस्थान सरकार ने केन्द्र के कुछ नेताओं से मिलीभगत कर राजस्थान को चारागाह समझ करर लूटा है। जनता की जेब कतरना और राज्य की सम्पदा पर डाका डाला।

कुछ मंत्रियों और अफसरों का यही काम रह गया थाा। दो हजार करोड़ से ज्यादा कीमत के बंगले पर मुख्यमंत्री ने कब्जा कर लिया है। जो समाचार पत्र जनता के हितों के लिए काम कर रहे हैं, उन पर सरेआम आर्थिक और राजनीतिक दमन का तंत्र चलाया गया। एेसा लगता है कि राजस्थान के भ्रष्टाचार के साथ दिल्ली के नेताओं का भी समझौता हुआ है और अब सब ने वसुंधरा राजे के आगे घुटने टेक दिए हैं।