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इस समय में मधुमक्खी पालन से होगा डबल फायदा

Bee Farming : आमदनी बढ़ाने के लिए किसानों को इंट्रीग्रेटेड फार्मिंग की सलाह कृषि विशेषज्ञों की ओर से दी जाती है।

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इस समय में मधुमक्खी पालन से होगा डबल फायदा

जयपुर

Bee farming : आमदनी बढ़ाने के लिए किसानों को इंट्रीग्रेटेड फार्मिंग की सलाह कृषि विशेषज्ञों की ओर से दी जाती है। ताकि किसान खेतीबाड़ी से जुड़ी किसी भी एक ही चीज पर निर्भर नहीं रहें। ऐसे में किसान अगर चाहें तो अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए पंरपरागत खेती के साथ ही कई उपाय भी कर सकते हैं। इनमें से एक है किसान खेती के साथ ही मधुमक्खी पालन भी कर सकते हैं। मधुमक्खी पालन के लिए अभी अच्छा समय है। वजह है कि इस समय किसान रबी सीजन की एक प्रमुख फसल सरसों की खेती कर रहे हैं। ऐसे में सरसों की खेती में सरसों पैदा करने के साथ ही किसान मधुमक्खी पालन से दोहरा लाभ कमा सकते हैं। काफी किसान ऐसा कर भी रहे हैं।

दरअसल, इन दिनों सरसों की फसल अपने पूरे शबाब पर होती है। नवंबर और दिसंबर में सरसों के फूल अपने चरम पर होते हैं। इस लिहाज से इस समय सरसों की खेती किसानों को डबल मुनाफा दे सकती है। किसान सरसों की खेत के पास ही मधुमक्खी पालन करके शहद का अच्छा खासा उत्पादन कर सकते हैं। किसान सरसों के फूलों से शहद उत्पादन कर सकते हैं। आपको बता दें कि शहद उत्पादन के लिए सरसों के खेतों में मधुमक्खी के बॉक्स लगाने का ये सही समय माना जाता है। मधुमक्खी पालकों के अनुसार करीब 1 सप्ताह में ही सरसों के फूलों से शहद उत्पादन किया जा सकता है। इस बारे में जानकारों का कहना है कि मधुमक्खी पालन को लेकर किसानों में कई तरह की भ्रांतियां भी हैं। काफी किसानों में इस बात की गलत भ्रांति है कि मधुमक्खी के बॉक्स अगर उनके खेतों में लगेंगे तो सरसों की पैदावार कम होगी। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुधमक्खियां परागण पहुंचाने का काम करती हैं।

परागण का काम करती हैं मुधमक्खी
सरसों की फसल में एक एकड़ में मधुमक्खी पालन करके किसान आमतौर पर किसान 7 से 8 क्विंटल सरसों की पैदावार कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि मधुमक्खी जब सरसों के फूलों पर बैठती हैं तो उसके पैरों में नर और मादा फूलों के परागकण चिपक जाते हैं। ऐसे में मधुमक्खी एक फूल का रस पीने के बाद जब दूसरे फूल पर पहुंचती हैं तो यही नर और मादा के परागकण आपस में मिलकर अच्छी गुणवत्ता के फूलों को विकसित करते हैं। इससे सरसों की पैदावार में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही एक तथ्य यह भी है कि सरसों का जब तेल निकाला जाता है तब सिर्फ मधुमक्खी की वजह से ही उसमें सल्फर की मात्रा 10 परसेंट तक बढ़ जाती है।

यहां अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान
ऐसे में सर्दी सीजन में नवंबर और दिसंबर के महीने में किसान सरसों के साथ ही शहद का उत्पादन करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। हरियाणा में कई जिलों में किसान व्यापक स्तर पर ऐसा करते हैं। हरियाणा के महेंद्रगढ़, झज्जर, रेवाड़ी, नारनौल, रोहतक के कुछ क्षेत्र, चरखी दादरी, सतनाली, कोसली, भिवानी, करनाल व कुरुक्षेत्र में सरसों के खेत में मधुमक्खी पालन के बॉक्स लगा दिए जाने हैं। ऐसे में हरियाणा में एक साल में करीब 60 हजार क्विंटल शहद का उत्पादन होने का अनुमान लगाया जाता है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान के कुछ इलाकों के साथ ही अन्य कई राज्यों में किसान इस तरह से दोहरा लाभ कमा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सरसों के फूलों से निकला शहद गुणवत्ता के हिसाब से काफी अच्छा माना जाता है।


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