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शादी के मंडप से हंसाकर विदा हुआ Bharat Rang Mahotsava

भारत रंग महोत्सव (भारंगम) रंगमंच के विभिन्न रंगों से रूबरू करवाने के बाद सोमवार को जवाहर कला केंद्र से विदा हो गया। समापन समारोह में जेकेके की अति. महानिदेशक प्रियंका जोधावत, अन्य पदाधिकारी व गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Feb 20, 2023

जयपुर: भारत रंग महोत्सव (भारंगम) रंगमंच के विभिन्न रंगों से रूबरू करवाने के बाद सोमवार को जवाहर कला केंद्र से विदा हो गया। समापन समारोह में जेकेके की अति. महानिदेशक प्रियंका जोधावत, अन्य पदाधिकारी व गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। प्रियंका जोधावत ने कहा कि भारंगम कई मायनों में खास रहा। इससे न केवल देशभर के कलाकारों को मंच मिला बल्कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों से रूबरू होने का मौका भी मिला। संवाद प्रवाह व भारंगम को सफल बनाने के लिए उन्होंने कला प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। आखिरी दिन परम बधानिया, गुनीत सिंह और प्रिंस राजपूत के निर्देशन में नाटक ‘शादी के मंडप में’ का मंचन किया गया। नाटक ने खूब हंसाने के साथ कई गंभीर सवाल समाज के समक्ष छोड़ दिए।

स्टेज सजा है, दूल्हा-दुल्हन विराजमान है, चल रही है तैयारी जयमाला की। नाटक का सेट आपको एक शादी में ले जाकर खड़ा कर देता है। राहुल को जयमाला से पहले रिश्तेदार कंधे पर उठा लेते हैं, डिम्पल को उसके जीजाजी, मुकुंद कंधे पर उठाते हैं। नीचे उतरते ही डिम्पल मुकुंद को थप्पड़ जड़ देती है। यकायक घोर सन्नाटा छा जाता है। शादी रुक जाती है और दौर शुरू होता है समझाइश का।
दुल्हन का पिता मुसीबत में फंस गया है। दामाद को कुछ कहे तो बड़ी बेटी की गृहस्थी पर आंच आती है। जीजा के व्यवहार से तंग छोटी बेटी का सब्र आज जवाब दे ही चुका है। नाते-रिश्तेदार समझाइश को आगे आते हैं तो खुद ही झगड़े कर बैठते हैं। अंत में डिम्पल और मुकुंद ही समस्या का समाधान करते हैं। नाटक एक व्यंग्य है, उन लोगों पर जो रिश्तों की लक्ष्मण रेखा को पार कर अपने हित साधने को आतुर है साथ ही उस सामाजिक व्यवस्था पर जो लड़की के पिता को बेबस बनाती है। आखिर क्या वजह रही जो डिम्पल अपने जीजा को थप्पड़ मार देती है? दरअसल मुकुंद पूर्व में उससे बदसलूकी कर चुका होता है पर वह कुछ कह ना सकी, शादी पर जब बात आगे बढ़ी तो उसने यह कदम उठाया। अंजना आहलूवालिया ने दुल्हन डिम्पल, शुभम मिश्रा ने दूल्हे राहुल, परम बढ़ानिया ने मुकुंद और राजकुमार राजपूत ने दुल्हन के पिता हरीश का रोल अदा किया।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) और जवाहर कला केंद्र के सहयोग से 15 से 20 फरवरी तक भारंगम का आयोजन हुआ। इस दौरान छह नाटकों का मंचन जेकेके में किया गया। जेकेके की ओर से संवाद प्रवाह का आयोजन किया गया, जिसमें नाट्य निर्देशकों व साहित्यकारों के बीच चर्चा हुई। इसी कड़ी में मंगलवार सुबह 11 बजे परम बधानिया, गुनीत सिंह और प्रिंस राजपूत व कविता मुखर के बीच चर्चा होगी।