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बिना चार्ज दिए डीजीपी भारद्वाज रिटायर

विदाई समारोह में मौजूद पुलिस अधिकारी भी चर्चा करते सुने गए कि मनोज भट्ट और नवदीप सिंह के नाम को लेकर ही सरकार में खींचतान चल रही है। 

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Jyoti Kumar

Feb 28, 2015

पुलिस महानिदेशक ओमेन्द्र भारद्वाज का विदाई समारोह कार्यक्रम नए डीजीपी के नाम के इंतजार में दिनभर आगे खिसकता रहा।

आखिरकार सूर्यास्त से आठ मिनट पहले बिना चार्ज दिए डीजीपी भारद्वाज खुद ही कार्यमुक्त हो गए। हालांकि इस दौरान नए डीजीपी बनने की दौड़ में शामिल चारों आईपीएस अधिकारी मनोज भट्ट, नवदीप सिंह, जसवंत सम्पतराम और अजीत सिंह मौजूद थे।

विदाई समारोह में मौजूद पुलिस अधिकारी भी चर्चा करते सुने गए कि मनोज भट्ट और नवदीप सिंह के नाम को लेकर ही सरकार में खींचतान चल रही है।

नए नाम की घोषणा भारद्वाज के रिटायर होने से पहले होने की उम्मीद थी। घर जाते समय भारद्वाज ने बताया कि नए डीजीपी की नियुक्ति होने तक पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारियों में सबसे वरिष्ठ अधिकारी विशेष डीजी नवदीप सिंह हैं, इसलिए डीजीपी का जार्च उन्हीं के पास रहेगा।

शनिवार की छुट्टी कर दी थी रद्द
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक 28 फरवरी को छुट्टी होने पर डीजीपी भारद्वाज की सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम शुक्रवार को रखा गया था। लेकिन सरकार की तरफ से नए डीजीपी के नाम की घोषणा नहीं होने पर पुलिस मुख्यालय में तैनात सभी अधिकारी, जवान और कर्मचारियों की शनिवार की छुट्टी रद्द कर दी गई।

शनिवार सुबह आरपीए में डीजीपी भारद्वाज को सलामी देने का कार्यक्रम रखा गया। इसके बाद विदाई समारोह दोपहर एक बजे पुलिस मुख्यालय में था। लेकिन दोपहर तक नए डीजीपी के नाम की घोषणा नहीं होने पर कार्यक्रम शाम पौने पांच बजे खिसका दिया गया। तब भी सरकार की ओर से आदेश नहीं मिलने पर कार्यक्रम छह बजे कर दिया गया।

उधर, साढ़े चार बजे से गार्ड ऑफ ऑनर के लिए जवानों को तैनात कर दिया गया। सूर्यास्त के बाद गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिए जाने पर आखिरकार डीजीपी भारद्वाज सूर्यास्त से ठीक आठ मिनट पहले शाम 6:20 बजे अपने कमरे से निकलकर गार्ड ऑफ ऑनर के लिए पहुंचे। वहां डीजीपी भारद्वाज को सलामी दी गई।

अधिकारी-जवान ज्यादा, छोटा पड़ा रस्सा
विदाई कार्यक्रम के अंत में पारम्परिक तरीके से डीजीपी भारद्वाज को गाड़ी में बैठाकर रस्से से खींचकर वाहन को गेट तक छोडऩे की परम्परा में अधिकारी और जवान उत्साहित दिखे।

डीजीपी भारद्वाज के मिलनसार व्यवहार के कारण हर कोई रस्सी को पकड़कर खींचना चाह रहा था। रस्सी छोटी पडऩे पर अधिकारी और जवानों ने उनकी कार को धक्का मारकर रस्म अदा की। कार में भारद्वाज के साथ पत्नी और बेटी भी मौजूद थीं।