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ठाकुरजी को सुनाया नए साल का पंचांग, किया गज पूजन

Bhartiy New Year-2080 : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बुधवार को ब्रह्म योग व शुक्ल योग में भारतीय नव संवत्सर—2080 शुरू हुआ। तीन साल बाद बुधवार को नवसंवत्सर की शुरुआत हुई।

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जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बुधवार को ब्रह्म योग व शुक्ल योग में भारतीय नव संवत्सर—2080 शुरू हुआ। तीन साल बाद बुधवार को नवसंवत्सर की शुरुआत हुई। नवसंवत्सर के साथ ही सौर मंडल के मंत्रीमंडल में बदलाव भी हुआ। नवसंवत्सर के राजा यानी राष्ट्रपति बुध बन गए है, वहीं शुक्र ग्रह सौर मंडल के मंत्री यानी प्रधानमंत्री बने। वहीं नव संवत्सर पर मंदिरों में ठाकुरजी को नया पंचांग सुनाया गया, आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में गज पूजन किया गया। मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ रही। सभी मंदिरों में विशेष झांकी सजाई गई।

आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में सुबह गज पूजन किया गया। सजे धजे गजराजों का पूजन कर पुष्प वर्षा की गई। गजराजों ने भी सूंड उठाकर अभिवादन किया। इससे पूर्व ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई। ठाकुर जी को नव संवत्सर का पंचांग पढक़र सुनाया गया। मंगला झांकी में शंख, घंटा, घडिय़ाल बजाकर मंगल ध्वनि की गई। श्रद्धालुओं के तिलक कर और रक्षा सूत्र बांधकर नव विक्रमी संवत्सर की शुभकामनाएं दी गई।

श्री आचार्य पीठ सरस निकुंज दरीबा पान में नवसवंत व दीक्षा महोत्सव आयोजित किया गया। श्रीशुक पीठाचार्य अलबेली माधुरीशरण के सान्निध्य में आचार्य महाप्रभु स्वामी श्याम चरण दास के लीला चरित्र व बधाईयों का गायन किया गया। ठाकुर श्रीराधा सरस बिहारी जु सरकार की श्रृंगार झांकी दर्शन हुए। दीक्षा महोत्सव व नवसंवत पंचांग का पूजन किया गया और ठाकुरजी को पंचांग श्रवण कराया गया।

खोले के हनुमान अखंड वाल्मीकि रामायण का पारायण
राजधानी के राम मंदिरों और हनुमानजी के मंदिरों में नवाह्न परायण पाठ हुए। जयपुर के कुल देवता के रूप में मान्य घाट के बालाजी मंदिर में स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज के सान्निध्य में रामचरितमानस का नवाह्न पारायण हुआ। श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ किए। श्री खोले के हनुमान मंदिर घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र प्रारंभ हुए। श्री नरवर आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि सुबह बदनपुरा के मुरली मनोहर मंदिर से गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा रवाना होकर खोले के हनुमान मंदिर पहुंची। इसके बाद घट स्थापना हुई। शाम को 201 आसन पर अखंड वाल्मीकि रामायण का पारायण शुरू हुआ।