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फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया का बड़ा फैसला…राज्य सरकार गैर फार्मासिस्ट को नहीं बना सकेगी स्टेट कौंसिल का अध्यक्ष

अब फार्मासिस्ट ही अध्यक्ष बनेंगे

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जयपुर
फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया ने छह माह में चौथा बड़ा फैसला लिया हैं। नए नियमों के अनुसार अब स्टेट कौंसिल का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष फार्मासिस्ट ही बनेगा। अब तक स्टेट कौंसिल के गैर फार्मासिस्ट भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनते रहे हैं।

लेकिन अब नए नियमों के अनुसार वहीं पदाधिकारी बनेगा जो खुद फार्मासिस्ट होगा। फार्मेसी कौंसिल ने सभी राज्यों के लिए यह नए आदेश जारी कर दिए है। जिसका असर राजस्थान फार्मेसी कौंसिल पर भी होगा। पीसीआई के अध्यक्ष डॉ.मोंटू कुमार पटेल ने मंगलवार को नए दिशा निर्देश जारी किए है।जिससे अब राज्य सरकार अपने चहेतों को पद पर नहीं बैठा सकेंगी।

राजस्थान में पहली बार बनेगा फार्मासिस्ट अध्यक्ष!
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सर्वेश्वर शर्मा ने बताया कि राजस्थान फार्मेसी कौंसिल के गठन के बाद से लेकर अब तक एक भी फार्मासिस्ट स्टेट कौंसिल का अध्यक्ष नहीं बन पाया है! क्योकि सरकार अपने चहेतों को पद देने के लिए गैर फार्मासिस्ट को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बना देती है।

जिससे फार्मासिस्ट अगर अपनी कोई पीड़ा या परेशानी लेकर पहुंचता है तो पद पर बैठा गैर फार्मासिस्ट उसकी पीड़ा का समाधान नहीं कर पाता है। ऐसे में अब नए निर्देश लागू होने पर पहली बार राजस्थान कौंसिल में भी फार्मासिस्ट अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनेगा।

ऐसे होता है पदाधिकारियों का चुनाव
स्टेट कौंसिल का कार्यकाल पांच साल का होता है। इसके लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट कौंसिल के सदस्यों को चुनते हैं। नियमों के अनुसार छह सदस्य इलेक्ट होते है और पांच लोगों को राज्य सरकार नॉमिनेट करती हैं।नियमों के अनुसार इनमें 3 फार्मासिस्ट और 2 नॉन फार्मासिस्ट को सरकार नॉमिनेट करती है।

ज्यादातर कार्यकाल में सरकार 2 नॉन फार्मासिस्ट ऐसे इलेक्ट करती है जो उनके चहेते होते हैं। ऐसे में उन्हें ही स्टेट फार्मा कौंसिल का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बना कर उन्हें पद दे देती है। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन राज्य फार्मेसी कौंसिल के पदाधिकारियों को लेकर लंबे समय मांग कर रहा था।

एसोसिएशन का कहना है कि अभी तक गैर फार्मासिस्ट अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनते रहे है। जिसके कारण गैर फार्मासिस्ट के पदाधिकारी होने पर फार्मासिस्टों को परेशानी होती थी।
पीसीआई के छह माह में चार बड़े फैसले
फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ.मोंटू कुमार पटेल ने फार्मासिस्ट की डिग्री और योग्यता के फर्जीवाड़ा को रोकने को लेकर छह माह में चार बड़े फैसले लिए है। इसमें अब ऐसे फार्मासिस्ट जो घर बैठे डिग्री ले रहे थे ऐसे लोगों को फार्मा से दूर करने के लिए डिग्री लेने के बाद एग्जिट एग्जाम की परीक्षा को अनिवार्य किया है। जो परीक्षा एनटीए आयोजित करवाएगा।

वहीं दूसरा फैसला देश में फार्मेसी की डिग्री करने वाले विद्यार्थी विदेशाें में भी अपनी सेवाएं दे सकें, इसके लिए सिलेबस में बदलाव किया जा रहा हैं।

तीसरा निर्णय फार्मासिस्ट के रजिस्ट्रेशन को लेकर किया था। जिसमें एक स्टेट का फार्मासिस्ट दूसरे राज्य में जाकर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकेगा और चौथा फैसला राज्य फार्मेसी कौंसिल के चुनाव को लेकर लिया है।