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विजय शर्मा
परिवहन विभाग में थ्री डिजिट के वीआइपी नंबरों को बैकलॉग करने और फिर उन्हें महंगे दामों में बेचने का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। विभाग की ओर से सीरीज बंद करने और बिना वाहन मालिक की जानकारी के बाद भी अफसरों और बाबुओं ने दलालों के साथ मिलकर वर्ष 1989 से पहले थ्री डिजिट के नंबरों को फर्जी तरीके से दूसरों के नाम कर दिया।
इतना ही नहीं, फर्जीवाड़ा छुपाने के लिए आरटीओ कार्यालयों से रिकॉर्ड भी गायब करा दिया। खास बात है कि थ्री डिजिट के इन वीआइपी नंबरों को सांसद, विधायक, अफसरों और उद्योगपतियों ने भी खरीदा है। जयपुर आरटीओ कार्यालय से फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने राज्य के सभी आरटीओ कार्यालयों में जांच कराई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया। विभाग की ओर से तैयार की गई अंतरिम रिपोर्ट में करीब 500 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई है।
इस पूरे खेल में विभाग के 450 से अधिक आरटीओ, डीटीओ, बाबू और सूचना सहायकों का शामिल होना पाया गया है। विभाग अब अंतिम रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। इस मामले में जब परिवहन आयुक्त से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जाएगा।
फर्जीवाड़ा कोटा, नागौर, जोधपुर, जयपुर, सलूंबर, सवाईमाधोपुर, बूंदी, हनुमानगढ़, उदयपुर और बीकानेर सहित कई जगहों पर हुआ है। 2018 के बाद विभाग ने आदेश जारी किया कि वाहनों का रजिस्ट्रेशन किसी भी आरटीओ कार्यालय में करवाया जा सकता है। इसी का फायदा उठाकर जिस आरटीओ कार्यालय में नंबर का रिकॉर्ड था, वहां से नंबर को बैकलॉग कर यानी नंबर ऑनलाइन चढ़ाए। इसमें फर्जी दस्तावेज भी लगाए और इस नंबर को रजिस्ट्रेशन कराने का काम दूसरे जिलों में किया।
-वर्ष 1989 से पहले थ्री डिजिट नंबरों की सीरीज को बंद की। यानी इन सीरीज के नंबर जारी नहीं किए जा सकते फिर भी भी अफसरों-बाबुओं ने बंद सीरीज के नंबरों को जारी किया।
-थ्री डिजिट नंबरों के जिन वाहनों के रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त हो गई, उन्हें वापस मनमर्जी से आगे बढ़ा दिया।
-पुराने मोपेड और अन्य वाहनों के बैकलॉग कर वाहनों में रजिस्ट्रेशन कर दिया।
-जिन वाहन मालिकों के वाहन कबाड़ हो गए, उनके नंबरों को दूसरे के नाम चढ़ा दिया और बेच दिए।
-8000 से अधिक थ्री डिजिट के नंबरों को बैकलॉग करने की पोल खुली
-5000 से अधिक नंबरों में फर्जीवाड़ा उजागर किया
-2000 से अधिक नंबरों का रिकॉर्ड गायब तो रिकॉर्ड से पन्ने फाड़े
-10-15 लाख रुपए कीमत में बेचा गया एक नंबर
-07 साल से चल रहा परिवहन विभाग में यह खेल
दरअसल, जयपुर आरटीओ प्रथम में बाबू और सूचना सहायक की ओर से किए गए फर्जीवाड़े की पोल खुली थी। जयपुर आरटीओ प्रथम राजेन्द्र शेखावत ने जांच कराई तो 70 से अधिक थ्री डिजिट के नंबरों को फर्जी तरीके से दूसरे वाहनों के नाम करने का मामला समाने आया। इस पूरे प्रकरण को राजस्थान पत्रिका ने एक्सपोज किया। इसके बाद जयपुर, सलूंबर, सवाईमाधोपुर में बाबू, डीटीओ और सूचना सहायकों पर कार्रवाई की गई। विभाग ने इसके बाद राजस्थान के सभी आरटीओ कार्यालयों की जांच कराई।
Updated on:
06 Jul 2025 07:59 am
Published on:
06 Jul 2025 07:59 am
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