जयपुर. राज्य सरकार ने राज्य में जैन समुदाय के मंदिर,पुरातात्विक धरोहरों,नव निर्माण और जैन समुदाय के लोक साहित्य एवं धर्मग्रंधों के प्रकाशन,प्रचार प्रसार,शोध,जैन धर्म श्रमण परंपरों के संरक्षण के संबध में सुझाव के लिए राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड का गठन कर दिया है। इस संबंध में शनिवार को सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के सचिव डॉ. समित शर्मा ने आदेश जारी किए। बोर्ड में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत पांच गैर सरकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा सरकारी सदस्यों में गृह, शिक्षा विभाग के सचिव,कला-संस्कृति और पुरातत्व विभाग,देवस्थान विभाग,सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग,अहिंसा एवं शांति विभाग,अल्पसंख्यक मामलात विभाग के आयुक्त व निदेशक या उनके प्रतिनिधि ( संयुक्त निदेशक स्तर) के अधिकारियों का मनोनयन होगा। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड का प्रशासनिक विभाग होगा। गौरतलब है कि पत्रिका ने श्रमण संस्कृति बोर्ड के गठन को लेकर लगातार बीते अंकों में मुद्दा उठाया।
यह होगा फायदा
बोर्ड के गठन से जैन धर्म संस्कृति संबंधित सभी धर्मायतन जैसे जैन तीर्थ क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, जैन मन्दिर, उपाश्रय, धर्मशालाएं, भोजनशालाएं, औषधालय, चिकित्सालय इत्यादि स्थलों की सुरक्षा, जैन साधु साध्वियों के विहार में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। जैन साहित्य मूलतः प्राकृत, अपभ्रंश एवं पाली भाषाओं में हस्तलिखित है तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों की सुरक्षा हेतु राज्यसरकार द्वारा जैन श्रमण संस्कृति बोर्ड के गठन से मजबूती मिलेगी।
यह बोले समाजजन
बोर्ड के गठन के बाद समाज के प्रबुद्धजनों ने पूरे फैसले की सराहना की। दिगम्बर जैन अतिशय क्षेेत्र महावीरजी प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष सुधांशु कसलीवाल और समाजसेवी अशोक पाटनी ने कहा कि श्रमण संस्कृति के विकास से देश में ही नहीं, पूरे विश्व में सुख, शांति और अहिंसा का वातावरण तैयार होगा। पं. जवाहरलाल नेहरू जी का पंचशील का सिद्धांत वृद्धिगत होगा। प्रमोद जैन पहाड़िया, अशोक जैन, अभिषेक जैन, संजय बापना, खिल्लीमल जैन, उमरावमल संघी, रूपिन काला, सुभाषचंद जैन, भारतभूषण अजमेरा सहित अन्य ने फैसले की सराहना की।
जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ जयपुर के संघ मंत्री प्रवीण नाहटा ने कहा कि राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड के गठन से जैन समुदाय के मंदिरों, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं नव निर्माण, जैन समुदाय के लोक साहित्य और ग्रंथों के संरक्षण व प्रकाशन आदि में उल्लेखनीय कार्य हो सकेंगे। राज्य सरकार के इस फैसले की सराहना है।