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कैसे मिले गरीबों को रात में आसरा, निकाय खर्च नहीं करते पूरा बजट

हर साल सर्दियों में गरीबों को रात के वक्त आसरा उपलब्ध कराने का सरकार दावा करती है। मगर हालात इसके विपरीत नजर आते हैं। निकाय अधिकारियों के ढुलमुल रवैय की वजह से ऐसा हो रहा है। अब रैन बसेरों को एक लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Nov 01, 2022

कैसे मिले गरीबों को रात में आसरा, निकाय खर्च नहीं करते पूरा बजट

कैसे मिले गरीबों को रात में आसरा, निकाय खर्च नहीं करते पूरा बजट

जयपुर। हर साल सर्दियों में गरीबों को रात के वक्त आसरा उपलब्ध कराने का सरकार दावा करती है। मगर हालात इसके विपरीत नजर आते हैं। निकाय अधिकारियों के ढुलमुल रवैये की वजह से ऐसा हो रहा है। अब रैन बसेरों को एक लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। सरकार की ओर से हर साल आवंटित की जाने वाली राशि को निकाय खर्च ही नहीं करते हैं। अगर यह पैसा खर्च हो जाए तो शायद रात के वक्त किसी गरीब को सड़क पर ना सोना पड़े।

आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2019 में सरकार ने 12.10 करोड़ रुपए का बजट पास किया था, लेकिन निकाय 8.30 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाए। इसी तरह 2020 में 12 करोड़ रुपए के मुकाबले 3.71 और 2021 में 12.90 करोड़ रुपए के मुकाबले केवल 3.94 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाया है। गौरतलब है कि प्रदेश में वर्तमान में 216 स्‍थाई एवं 64 अस्‍थाई आश्रय स्‍थल संचालित किए जा रहे हैं।

जयपुर में भी हाल अच्छे नहीं

जयपुर में भी रैन बसेरों के हालात अच्छे नहीं है। दोनों नगर निगम पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का तो दावा करते हैं, लेकिन सर्दी में बारिश आने पर इन रैन बसेरों में रात गुजारने वाले लोगों के समक्ष संकट खड़ा हो जाता है। हालांकि रैन बसेरों में जन सहयोग से गरीबों को निशुल्क भोजन जरूर उपलब्ध करवाया जा रहा है।


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फैक्ट फाइल

— शहर में 14 जगहों पर बनाए जा रहे अस्थाई रैन बसेरे
— जयपुर ग्रेटर नगर निगम बना रहा 10 अस्थाई रैन बसेरे
— हैरिटेज नगर निगम बना रहा 4 अस्थाई रैन बसेरे
— शहर में है 14 जगहों पर स्थाई रैन बसेरे

वर्ष— प्रावधान— व्‍यय राशि (लाख रुपए में)

2019— 1210—830.37

2020— 1200— 371.35

2021— 1290 —394.45

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