
रिसोर्ट और मोटल संचालकों को बड़ी राहत, जानें किस तरह पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
जयपुर। राज्य सरकार ने रिसोर्ट और मोटल संचालकों को भारी भरकम लीज राशि चुकाने से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ी छूट दी है। मोटी लीज राशि एक साथ लेने की बजाय उन्हें दो साल में चुकाने की मोहलत दे दी गई है। इसके तहत चार छमाही किश्तों में दो साल में पूरी राशि दे सकेंगे। नगरीय विकास विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस व्यवस्था के पीछे कुछ 'चहेतों' पर भी फोकस रहा। हालांकि, सरकार ने होटल एसोसिएशन के प्रतिवेदन मिलने और कोरोना काल में चरमराए पर्यटन उद्योग को संजीवनी मिलने का तर्क दिया है। अफसरों का कहना है कि कोरोना काल के कारण मोटल व रिसोर्ट संचालकों के आर्थिक हालात ठीक नहीं है। प्रदेश में ऐसे 7 हजार से ज्यादा रिसोर्ट, मोटल का संचालन हो रहा है। इन पर करोड़ों रुपए की लीज राशि बकाया है।
इस तरह तय होगा छूट का रास्ता
-प्रशासन शहरों के संग अभियान में एकमुश्त लीज राशि जमा कराने पर बकाया राशि पर 60 प्रतिशत की छूट दी हुई है।
-फ्री होल्ड पट्टा लेने के लिए आगामी दस वर्षों की लीज राशि जमा कराना आवश्यक है।
-नगरीय विकास विभाग के जारी आदेश के अनुसार बकाया राशि की चालीस प्रतिशत और आगामी दस वर्षों की लीज राशि जोड़ी जाएगी।
-जोड़ी गई कुल लीज राशि मोटल व रिसोर्ट संचालक चार छमाही किश्तों में जमा करा सकेंगे।
-चारों किश्तें जमा कराने पर ही निकाय की ओर से रिसोर्ट या मोटल संचालक को उसके भूखंड का फ्री होल्ड पट्टा जारी किया जा सकेगा।
-पहली किश्त जमा कराने पर आवेदक को शेष तीन किश्तों के पोस्टडेटेड चैक देने होंगे।
-संचालकों को यह छूट लेने के लिए संबंधित निकाय में इस वर्ष 31 मार्च तक आवेदन करते हुए प्रथम किश्त व तीन शेष किश्तों के चैक देने होंगे।
छूट दिए जाने का आधार
-भवन विनियमों के तहत मोटल के लिए न्यूनतम 4 हजार वर्गमीटर और रिसोर्ट के लिए न्यूनतम 8 हजार वर्गमीटर भूमि जरूरी है।
-दोनों ही मामलों में कुल भूमि के 20 प्रतिशत क्षेत्रफल तक ही निर्माण किया जा सकता है, 80 प्रतिशत क्षेत्रफल खुला छोड़ना अनिवार्य है।
-इसी प्रकार चाहे मोटल हो या रिसोर्ट, दोनों में ही भूतल व प्रथम मंजिल तक निर्माण अनुज्ञेय है।
-ऐसे में मोटल व रिसोर्ट के लिए भूमि तो अधिक होती है, लेकिन सीमित क्षेत्रफल में ही निर्माण करने करने की अनुमति है। जबकि, लीज राशि मोटल व रिसोर्ट संचालक को पूरी भूमि की चुकानी होती है।
यह है रिसोर्ट और मोटल
1. मोटल— मोटल शब्द मोटर और होटल को मिलाकर बना है। मोटल का संचालन ज्यादातर हाइवे पर ही होता है। हाइवे से गुजने वाले मुसाफिर, यात्री यहां रात भर रुकते हैं। यहां खाने की सुविधा की बंदिश नहीं है। कमरे के साथ ही ओपन पार्किंग स्पेस भी होता है। कई मोटल में तो वाहन सुधारने के लिए वर्कशॉप भी होती है।
2. रिसोर्ट— रिसोर्ट लग्जरी जगह है। यहां खाने से लेकर स्पोर्ट्स, स्वीमिंग पूल, स्पा, एटरटेनमेंट और एडवेंचर जैसी तमाम सुविधाएं मिलती है। ज्यादातर रिसोर्ट ग्रामीण इलाकों में है।
Published on:
12 Feb 2022 06:20 pm
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