10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

JLF 2026: कराची मेरे लिए एक शहर नहीं, बल्कि भाई-बहन जैसा, जिसे मैंने कभी देखा नहीं :भावना सोमाया

भावना सोमाया ने कहा कि उनका जन्म विभाजन के बाद हुआ, लेकिन कराची उनके लिए एक शहर नहीं, बल्कि ऐसा भाई-बहन है जिसे उन्होंने कभी देखा नहीं। उनके माता-पिता कराची से भारत आए थे और घर में कराची की बातें हमेशा होती थीं।

2 min read
Google source verification
JLF

Photo: Patrika

बागान में आयोजित सत्र ‘पार्टिशन स्टोरीज : विभाजन की कथाएं’ सत्र में देश के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्याय—1947 के विभाजन को मानवीय दृष्टि से समझने का प्रयास किया गया। सत्र की मॉडरेटर ताबिना अंजूम रहीं। इस पैनल में वक्ता लेखिका और फिल्म पत्रकार भावना सोमाया तथा किश्वेर देसाई ने अपने-अपने जीवन और परिवार से जुड़े विभाजन के अनुभवों को बेहद संवेदनशीलता के साथ साझा किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में ताबिना अंजूम ने कहा कि विभाजन केवल तारीखों, सीमाओं और आंकड़ों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह आज भी लोगों की यादों, परिवारों की कहानियों और मौन में जीवित है।

देसाई ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके माता-पिता दोनों लाहौर से थे। 1947 से पहले लाहौर एक शांत, सांस्कृतिक और समृद्ध शहर था, जहां हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे। उनकी मां उस समय केवल 13 वर्ष की थीं। अचानक बदले हालात में परिवार को रातों-रात सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके पिता जीवन के अंतिम दिनों तक आंखें बंद करते ही खुद को अनारकली बाजार में घूमते हुए महसूस करते थे।

देसाई ने कहा कि 2017 में स्वतंत्रता और विभाजन की 70वीं वर्षगांठ के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि देश में ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहां विभाजन से प्रभावित लोगों की स्मृतियों को संजोया गया हो। इसी सोच से पार्टिशन म्यूजियम की नींव पड़ी। यह म्यूजियम पूरी तरह लोगों के सहयोग से बना है, जहां शरणार्थियों की वस्तुएं, मौखिक इतिहास और व्यक्तिगत स्मृतियां संग्रहित हैं। अमृतसर और दिल्ली में बने इन संग्रहालयों का अंतिम कक्ष ‘गैलरी ऑफ होप’ है, जो यह संदेश देता है कि ऐसा विभाजन दोबारा कभी नहीं होना चाहिए।

भावना सोमाया ने कहा कि उनका जन्म विभाजन के बाद हुआ, लेकिन कराची उनके लिए एक शहर नहीं, बल्कि ऐसा भाई-बहन है जिसे उन्होंने कभी देखा नहीं। उनके माता-पिता कराची से भारत आए थे और घर में कराची की बातें हमेशा होती थीं। उन्होंने बताया कि जब परिवार के बड़े सदस्य एक-एक कर दुनिया से जाने लगे, तब उन्हें लगा कि अगर वह अपने माता-पिता की कहानी नहीं लिखेंगी तो कोई नहीं लिखेगा।

उन्होंने अपने लेखन से जुड़ा एक भावुक अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह किताब लिखना उनके लिए बेहद कठिन था। कई बार लिखते समय वह रो पड़ीं। उन्होंने अपने ननिहाल के कराची स्थित घर का एक अंश पढ़ा, जिसमें उस समय की समृद्ध जीवनशैली, कला, सुगंध और स्मृतियों का मार्मिक वर्णन था। यह सुनकर श्रोतागण भावुक हो उठे। महात्मा गांधी ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले कहा था कि यह विभाजन सदियों तक चलेगा और कभी खत्म नहीं होगा।

महिलाओं की भूमिका पर बात करते हुए देसाई और सोमाया ने कहा कि विभाजन के इतिहास में महिलाओं की पीड़ा और संघर्ष लंबे समय तक अनकहे रहे। म्यूजियम में महिलाओं की कहानियों के लिए अलग खंड हैं, जहां यह दिखाया गया है कि कैसे महिलाओं ने अत्याचार झेलने के बावजूद नए जीवन की शुरुआत की, बच्चों को पढ़ाया और समाज को संभाला।

युवा पीढ़ी के संदर्भ में वक्ताओं ने कहा कि इन कहानियों से आज के युवाओं को सहानुभूति, धैर्य और उम्मीद की सीख मिलती है। जिन लोगों ने सब कुछ खोकर भी जीवन दोबारा खड़ा किया, उनकी कहानियां आज के समय में प्रेरणा देती हैं। विभाजन का दर्द कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन स्मृतियों को सहेजकर, उनसे सीख लेकर और उम्मीद के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी
: https://bit.ly/4bg81fl

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग